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खाली जेब से सफर शुरू कर वीनस वाणी ने बनाई भरोसेमंद कंस्ट्रक्शन कंपनी

Posted on: 18 May 2018 10:54 by Praveen Rathore
खाली जेब से सफर शुरू कर वीनस वाणी ने बनाई भरोसेमंद कंस्ट्रक्शन कंपनी

अध्यापक सुभाष वाणी के पुत्र वीनस वाणी ने महेश्वर में 11वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद इंदौर का रुख किया। इंदौर आने का उद्देश्य ग्रेजुएशन करना था। महेश्वर से आए तब जेब खाली थी और इंदौर में कहीं ठिकाना भी नहीं था, जहां सर छिपा सके। जैसे-तैसे किराए का पर एक कमरा लिया और नौकरी करते हुए इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। संघर्षपूर्ण जीवन में वाणीजी ने आज अपनी मेहनत और ईमानदारी से कंस्ट्रक्शन लाइन में खास मुकाम हासिल किया। दो दशक में 10 मल्टी स्टोरी और लगभग 150 बंगले बना चुके हैं। घमासान डॉटकॉम ने उनसे बातचीत की… venus 1

सवाल : आपके करियर की शुरुआत कहां से हुई?
जवाब : मेरा जन्म महेश्वर में हुआ, स्कूल शिक्षा भी महेश्वर में ही हुई। 11वीं पास करने के बाद आगे की पढ़ाई के लिए पिताजी से कहा तो वे बोले कि यदि बड़े शहर में पढऩे जाना चाहते हो तो अपना खर्च खुद को ही वहन करना पड़ेगा। चूंकि पिताजी अध्यापक थे और उनकी इतनी कमाई भी नहीं थी, कि वे हम दो भाई और एक बहन तीनों की पढ़ाई और घर का खर्च वहन करना उनके लिए मुश्किल था। पिताजी से अनुमति ली और मैं हिम्मत कर पढ़ाई के लिए इंदौर आ गया। बड़े शहर में जाकर पढऩे की इच्छा थी, लेकिन जेब खाली थे। घर से कुछ पैसा नहीं मिल पाएगा, ये पहले से ही पता था। फिर भी मैं इंदौर आया और यहां आकर डिप्लोमा सिविल इंजीनियरिंग, ग्रेजुएशन पूरा किया। पढ़ाई के खर्च के लिए एक छोटी कंस्ट्र्क्शन कंपनी में नौकरी की। तब छह सौ रुपए वेतन मिलता था, उसमें भी आधे पैसे कमरे के किराए और खाने में खर्च हो जाते थे। थोड़े दिन बाद वेतन बढक़र 900 रुपए हो गया। इसी बीच पिताजी की दोनों किडनी खराब हो गई, उनको डायलिसिस करना पड़ता था। उस समय डायलिसिस की सुविधा इंदौर में ही थी, पैसा भी जितना कमाते थे, पिताजी के इलाज में खर्च हो जाता था। पांच साल तक नौकरी की, लेकिन इतने पैसे में काम नहीं चल रहा था। फिर सोचा कि अपना कोई बिजनेस करेंगे तो नौकरी इतना तो कमा ही लेंगे, इसलिए मैंने रिस्क ली, जॉब छोड़ा और प्रॉपर्टी का बिजनेस शुरू किया। पूंजी तो थी नहीं, ईमानदारी से काम करते रहे। धीरे-धीरे प्रॉपर्टी का कामकाज बढ़ता गया। कुछ पूंजी भी इकट्ठी हो गई। अच्छा काम करते थे, तो काम भी मिलने लगा। हमने कॉलोनियों में छोटे-छोटे मकान-बंगले बनाए। शहर में कंस्ट्रक्शन क्षेत्र में पहचान बनने लगी। पिछले दस साल में करीब डेढ़ सौ बंगले और दस मल्टीस्टोरी बना चुके हैं।

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सवाल : कंस्ट्रक्शन के अलावा और क्या बिजनेस करते हैं?
जवाब : दो साल पहले हमने कंस्ट्रक्शन काम के साथ साथ रुफटाफ सोलर एनर्जी प्लांट का काम शुरू किया। एक ऑफिस हमारा नासिक में भी है, सोलर में भी हम शिद्दत के साथ काम कर रहे हैं, ऐसा लगता है कि बहुत जल्द ही हम इस क्षेत्र में अपनी पहचान बना लेंगे। शुरुआती दौर में ही अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। चूंकि अब सोलर सिस्टम में जितनी खपत होती है, उसके अलावा ज्यादा बिजली बनती है, वह बिजली कंपनी को दे दी जाती है, माह के अंत में कितनी बिजली आपने बिजली कंपनी से ली और कितनी बिजली सोलर के द्वारा बिजली कंपनी को दी, उसका समायोजन होकर अंतर की राशि ही भुगतान करना पड़ती है, जिन लोगों ने रुफटाफ सोलर सिस्टम लगवाया उनके बिजली के बिल में 90 फीसदी तक बचत होने लगी है, इसलिए अब सोलर सिस्टम के लिए भी मांग आने लगी है।

सवाल : बिजनेस में नया क्या कर रहे हैं?
जवाब : ब्रिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर के नाम से अभी हमने नया काम शुरू किया है। इसमें हम वन स्टॉप सॉल्यूशंस दे रहे हैं। आपने देखा होगा कि नौकरीपेशा व्यक्ति हो या कोई बिजनेसमैन व्यक्ति जीवन में यदि खुद मकान बनवाता है, तो वह मटेरियल सप्लायर्स, लेबर, कॉन्ट्रेक्टर आदि से इतना त्रस्त हो जाता है, मकान पूरा होते-होते उसकी स्थिति बहुत ही खराब हो जाती है। उनका तनाव इतना बढ़ जाता है कि वह सोचता है कि बस जैसे-तैसे मकान पूरा हो जाए। लोगों की इसी परेशानी को ध्यान में रखते हुए हम वन स्टॉप सॉल्यूशन दे रहे हैं, जिसमें प्लॉट खरीदने से लेकर भवन निर्माण और उसके इंटीरियर तक की जवाबदारी लेते हैं और पार्टी के किए गए एग्रीमेंट के अनुसार हम उसमें वही सब मटेरियल लगाते है, जिसका कमिटमेंट किया गया है। वन स्टॉप का मतलब हम प्लॉट खरीदने से लेकर, लोन मंजूर करवाने, नक्शा पास करवाने, मकान बनवाने और उसके इंटीरियर तक की सेवा एक ही छत के नीचे दे रहे हैं। इसके अंतर्गत हम काम होता जाएगा और उनसे पैसा किस्तों में लेते जाएंगे। हमारा उद्देश्य है कि हम सपनों का घर बनाकर दें, किसी को निराश नहीं करें।
सवाल : आपकी हॉबी क्या है?

जवाब : फोटोग्राफी का शौक रहा, उसके लिए मैंने कैमरा भी खरीदा। बिलियर्ड खेलना अच्छा लगता है। इसके अलावा स्वीमिंग का भी शौक है। इसके अलावा लायंस क्लब, भारत विकास परिषद संस्था के माध्यम से पर्यावरण जागरूकता के लिए काम करता हूं।

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