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दो हजार से पांच हजार रुपए में हो रहा है गंभीर बीमारियों को इलाज

Posted on: 03 May 2018 11:24 by hemlata lovanshi
दो हजार से पांच हजार रुपए में हो रहा है गंभीर बीमारियों को इलाज

इंदौर: क्या आप बीमार हैं? पानी की तरह पैसा बहाने पर भी आराम नहीं लग रहा, तो आप चिंता न करें। अब शहर में ही सारी बीमारियों का इलाज संभव है वो भी मात्र दो हजार से लेकर पांच हजार रुपए में। दवाइयों का झंझट भी नहीं, आॅपरेशन का डर नही और ना ही हॉस्पिटल में एडमिट होने की परेशानी। बस ठीक होने के लिए चाहिए आपकी मेहनत और सही दिनचर्या।

आप भी सोच रहे होंगे आखिर ऐसा कौन सा इलाज है, तो आइए आपको बताते हैं ऐसे ही  आयुर्वेदिक पंचकर इलाज के बारे में। घमासान डॉट कॉम से चर्चा कर पंचकर्म जैसे विशेष इलाज के बारे में बताया सत्त्वम आयुर्वेद मल्टी स्पेशलिटी आयुर्वेद क्लीनिक एवं पंचकर्म सेन्टर के आॅनर वैद्य जैन ने।

chetan 2लोग अलग आॅप्शन ढूंढ़ रहे हैं

चेतन जैन ने बताया कि मेरे पंचकर्म सेन्टर पर बहुत से ऐसे लोग आते हैं, जो इलाज करा-करा कर थक चुके हैं या अपनी बीमारियों से काफी परेशान हो चुके हैं। अब पेशेंट्स मेडिसिन, आॅपरेशन के अलावा अलग आॅप्शन ढूंढ़ रहे हैं। बीमारियों को ठीक करने में पानी की तरह मरीज पैसा लगा देते हैं पर फिर भी आराम नहीं होता। सालों पुरानी बीमारी के दर्द के कारण मरीजों का काम में मन नही लगता हमेशा गुस्सा करते हैं। लंबे समय तक दवाइयां लेने से नुकसान भी होता है। कई साल पुरानी बीमारी वाले लोग आ रहे हैं सेन्टर पर। माइग्रेन, मोटापा, जोड़ों का दर्द, हाथ पैरों में सूजन, अकड़न, स्किन प्रॉब्लम, पेट की बीमारियां, बाल के रोग, बंधयत्व, श्वास रोग सहित अन्य बीमारियों के मरीज आ रहे हैं। पंचकर्म प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति है। पंचकर्म के इलाज में मरीजों की जेब पर भार नहीं आता।

chetan 3सस्ता मगर कारगर इलाज

आयुर्वेद को लोग अब समझ रहे हैं। हमारे सेंटर पर हर तरह की बीमारियों का इलाज होता है। कोशिश की जाती है कि मरीजों का इलाज कम से कम खर्च में हो। नॉर्मल बीमारियों का इलाज दो से तीन महिनों में मात्र दो हजार रुपए से पांच हजार रुपए में हो जाता है। जहां तक बात गंभीर बीमारियों की होती है यह अमाउंट दस हजार रूपए तक का होता है। पंचकर्म के माध्यम से शरीर के विजातीय तत्वों को बाहर निकाला जाता है। देर से ही सही पर स्थाई इलाज होता है।

chetan 4स्लो नही है आयुर्वेद

कई लोग मानते हैं कि आयुर्वेद तो स्लो हैं धीरे काम करेगा धीरे-धीरे बीमारी दूर करेगा, इसलिए कई रोगी आयुर्वेद में आना नही चाहते। आयुर्वेद स्लो नहीं है। बहुत ही तेजी से काम करता हैं पर क्या हम उसकी तेजी को समझ पाते है या नहीं, बस यही सोच का फर्क हैं। आयुर्वेद एक प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति है और प्रकृति में हर कार्य एक समय अवधि में पूर्ण होता हैं। बात करे पुनः आयुर्वेद की तो आयुर्वेद तो तेजी से कम करती हैं परंतु आयुर्वेद भी प्राकृत है तो यह शरीर मे जाकर रोग को भी प्राकृतिक रूप से ठीक करती है इसलिए कुछ रोगों और रोगियों में समय अधिक लगता हैं कुछ में कम। पर जैसे बच्चे बड़े होकर पुनः छोटे नहीं हो जाते वैसे ही आयुर्वेद का लाभ भी स्थिर रहता हैं।

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गंभीर स्थिति में आते हैं मरीज
रोग के ठीक होने में अधिक समय हमारी गलतियों से भी लगता है हममें से अधिकतर लोग कभी भी बीमारी की नवीन स्थिति में आयुर्वेद नहीं अपनाते बल्कि 5-10 वर्ष व्याधि के साथ व्यतीत करके और एलोपैथी में उस रोग का इलाज उपलब्ध ना होने की स्थिति में आयुर्वेद की शरण में आते है, तो जब व्याधि से रोगी ने बहुत घनिष्ट मित्रता बना ली है तो कैसे यह सोचा जा सकता हैं कि 10 वर्ष पुरानी व्याधि 10 दिन में ठीक हो जाएगी।

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