Valmiki Jayanti 2018 : जानिए आखिर कैसे एक डाकू से महात्मा बने महर्षि वाल्मीकि

0
245
maharishi-valmiki-jayanti-2018

आज महर्षि वाल्मीकि जयंती है. आज हम आपको रामायण के रचयिता वाल्मीकि की जयंती पर उनके बारें में कुछ खास बात बताने जा रहे है. क्या आप जानते है कि रामायण के रचयिता वाल्मीकि एक लुटेरे और डाकू थे. आदिकवि के रूप में प्रसिद्ध महर्षि वाल्मीकि एक समय कुसंगति के कारण लुटेरे और डाकू बने थे.

Via

जी हां ऐसा कहा जाता है कि, एक समय महर्षि वाल्मीकि ने बहुत सी हत्या और हिंसा की है. कई वर्षो तक ऐसा अधर्म महर्षि वाल्मीकि करते रहे. एक समय संयोगवश देवर्षि नारद महर्षि वाल्मीकि के सामने से गुजर रहे थे. अचानक से देवर्षि नारद को आवाज़ आई, जो कुछ भी तेरे पास है सब यही रख दो, नहीं तो मरने के लिए तैयार हो जाओ. थोड़ा डरते हुए देवर्षि नारद ने कहा, कोई बात नहीं यह वीणा और वस्त्र है इसे ले सकते हो, लेकिन मुझे मत मारो.

Via

वाल्मीकि ने नारद से कहा, वीणा किस काम आती है जरा गाकर तो सुनाओ. इसके बाद बहुत ही मीठे स्वर में नारद जी ने वाल्मीकि को त्रिलोक के पावन नामों का कीर्तन करके सुनाया. नारद जी के इस मीठे कीर्तन का डाकू वाल्मीकि पर इतना प्रभाव पड़ा कि, वो कठोर डाकू अब कोमल वाल्मीकि बन गया. मौका देखकर नारद जी ने वाल्मीकि से कहा व्यर्थ में जीव हत्या करके पाप कमा रहे हो. ऐसा मत करो.

Via

वाल्मीकि ने नारद जी से कहा मेरा परिवार बड़ा है, आजीविका का दूसरा कोई साधन नहीं है. डाका डालकर चोरी करके ही घर का खर्चा चलाता हूं. अगर ये सब नहीं किया तो परिवार भूख से ही मर जाएगा. इसके बाद नारद जी ने कहा कि तुम घर जाओ और घरवालों से पूछों, तुम जो पाप कर रहे हो उसकी सजा पाने के लिए क्या वो भी तुम्हारा साथ देंगे.

Via

यह सुनकर वाल्मीकि ने नारद जी को तुरंत वही पेड़ के साथ बांध दिया. इसके बाद घर जाकर उन्होंने परिवार के एक-एक सदस्य से पूछा क्या वे उनके पाप के हिस्सेदार है. परिवार के सभी सदस्यों ने साथ में कहा कि, देखो हमारा पेट पालना तुम्हारा काम है. कैसे और कहा से पैसा लाते हो यह सब तुम जानों. हम तुम्हारे पाप के हिस्सेदार नहीं हो सकते है. अचानक से अपने परिवार के सदस्यों का यह जवाब सुनकर वाल्मीकि को बहुत ही दुःख हुआ. उनकी आंखे खुल गई. जिनके लिए वो हिंसा कर रहे थे, वही उनका साथ देने के लिए तैयार नहीं है.

इसके बाद उन्होंने नारद जी को बंधन मुक्त किया और माफ़ी मांगी. इसके बाद वाल्मीकि को नारद जी ने सब कुछ भुलाकर राम नाम का मन्त्र देते हुए कहा इस मन्त्र में बड़ी शक्ति है. इसका जप करने से तुम्हारे सारे पाप धुल जाएंगे. जीवन तुम्हारा अच्छा हो जाएगा. फिर से तुम्हे ये सब करने का विचार मन में नहीं आएगा. लेकिन वाल्मीकि ने कहा कि मेरे मुंह से पापों के कारण ये शब्द भी नहीं निकल रहे है. इसके बाद वाल्मीकि को नारद जी ने कहा कि तुम मरा-मरा ये मंत्र बोलो, जिसका उल्टा राम ही होता है. इसके बाद वाल्मीकि ने मरा-मरा बोलना शुरू कर दिया. लेकिन वो बोलते-बोलते राम ही हो गया. इस मन्त्र के प्रभाव से उनके अंदर का हिंसा करने वाला और चोरी करने वाला डाकू मर गया और वो आदिकवि महर्षि वाल्मीकि बन गए.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here