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वामा साहित्य मंच ने मणायो लोकगीता को पर्व, अर्जुन राठौर की कलम से….

Posted on: 28 Oct 2018 17:39 by krishnpal rathore
वामा साहित्य मंच ने मणायो लोकगीता को पर्व, अर्जुन राठौर की कलम से….

वामा साहित्य मंच ने मणायो लोकगीता को पर्व…लोकगीत तो प्रकृति को उद्गार है अणा में अतरी ताकत वे है कि जो मनका की संवेदना जगई ने प्रेम ने मधुरता फैलावे ने तन्मयता का लोक में पहुँचई दे है। लोकगीत को विषय मनका की सहज संवेदना से जूड़या थका वे है। अणा गीता में प्रकृति को रंग रूप ,सुख दुःख, और कित्ताई संस्कार, जनम-मरण ने परण ने घणी सुंदरता ने मनभावन तरीका से गावे है…

सामाजिकता ने जिंदा रखवा का वास्ते लोकगीत ने लोक संस्कृति सहेजणो खूब जरूरी है अणीज वास्ते औरता ने समाज को दुखड़ो, अपमान, घर गृहस्ती का ताना-कस्सी,जीवन की उठा पटक , राजी-खुशी लोकगीत में गई ने अपणो मन हलकों करी ले है। अणीज वास्तेज आज तलक लोकगीत जिंदो है ने ईको हगरो श्रेय म्हारी बेना नेज जावे है….

वामा मंच की हगरी बेना ने असा-असा सुन्दर लोकगीत गाया की मन प्रसन्न वई ग्यो… मैं भी थोड़ी सी कोशिश करी…पेला तो मन ने नरो हमझायो कि नी गऊ पर मन तो माने जदी के …तो आखिर में हिम्मत करी ने हरियाणवी गीत गई दियो.. था भी सुणो….

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