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वामा साहित्य मंच ने रसीली रचनाओं के साथ मनाया वसंतोत्सव

Posted on: 07 Feb 2019 20:14 by mangleshwar singh
वामा साहित्य मंच ने रसीली रचनाओं के साथ मनाया वसंतोत्सव

वसंत ऋतु की नशीली आहट के साथ ही कला, साहित्य और संस्कृति के वाहक रचनात्मक ऊर्जा और सृजनात्मक अनुभूतियों से भर जाते हैं।। शहर की
जानी-मानी साहित्य संस्था वामा साहित्य मंच ने 7 फरवरी 2019 को होटल अप्सरा में इस मदमाती रसीली ऋतु का अपनी नवीनतम रचनाओं से
स्वागत किया। ऋतुराज वसंत यूं भी नूतन का, राग, रंग, रस, ऊर्जा और प्रेम का प्रतीक है। इस मौसम में चारों तरफ प्रकृति अपने सुकुमार फूलों के
आंचल से आच्छादित हो जाती है। चारों तरफ मीठी बयार बहने लगती है, हरियाली और खुला-खुला स्वच्छ आकाश कवि मन को मधुर अनुभूतियों से
भर देता है। वामा साहित्य मंच की सदस्य इसी वासंती मौसम के रंग में डूब कर आई और अपनी आकर्षक रचनाएं वसंत को समर्पित की।

इस आयोजन में वसंत को केंद्र में रखकर प्रेम, रिश्ते, मौसम, प्रकृति, हरियाली,फूल, सरस्वती, रंग जैसे शब्दों से कविताएं रची और बुनी गई। मुख्य

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अतिथि के रूप में इन रचनाओं की साक्षी बनीं डॉ. मीनाक्षी जोशी। उन्होंने अतिथि उद्बोधन में कहा कि ” वसंत दो बार जागृत होता है। यह ऋतु संधि का काल होता है। भारतीय काल गणना में वसंतऋतु का महत्व है ,यह उन्मेष का काल है। इसका मानवीय प्रेम , पर्व , पर्वहेतु से इसका गहरा संबंध है।रचना पाठ करने वाली सदस्यों में अध्यक्ष पद्मा राजेन्द्र, सचिव ज्योति जैन सहित
अमरवीर चड्ढा, निरूपमा नागर, कोमल रामचंदानी, इंदू पाराशर, पूर्णिमा भारद्वाज,उर्मिला मेहता, भावना दामले, शारदा मंडलोई, बकुला पारेख, स्नेहा
काले, विनीता मोटलानी, सुजाता देशपांडे, रश्मि लोणकर शा‍मिल थीं।

कार्यक्रम का संचालन नूपुर प्रणय वागले ने किया। इस बार आयोजन की तीन सदस्यीय समिति में निशा देशपांडे और सरला मेहता भी शामिल थीं।
आरंभ में सरस्वती वंदना निशा देशपांडे ने प्रस्तुत की तथा आभार सरला मेहता ने माना।

आयोजन में प्रस्तुत प्रमुख कविताएं

वसंत बहार/ रश्मि लोणकर🖋

खुशबू की डोली में
सजकर आया वसंत बहार
छेडी तान पपीहे ने
मोर दिखा रहा है नाच

चहुं और हरियाली है छाई
डोल रही है सरसो की डाली
मानो धरती ने ओढी पीली चुनरीया
मधुर स्वर में गा रही कोयलिया….

कोमल वाधवानी/ कविता🖋

मेरे जीवन में बसंत आया ।
जब मैंने कैंसर को हराया ।।

पद्मा राजेन्द्र🖋

सुन द्वार की दस्तक,
मैंने खोला दरवाजा,
देखा तो वसंत था खड़ा,
मैं मुस्कुराई, थोड़ा सा…..

निरूपमा नागर🖋

हे ऋतुराज ,तुम आओ चाहे चुपचाप ,
मैं सुनती हूं हर कहीं तुम्हारी पदचाप ।।

सुजाता देशपांडे ने BASANT अंग्रेजी शब्द का हिन्दी में अर्थ समझाया।

विनीता मोटलानी और ज्योति जैन ने लघुकथाएं पढ़ीं।

शारदा मण्डलोई🖋

पात पात क्यों झरे
महके महके से उत्तर मिले…

बकुला पारेख🖋

आओ स्वागत करें सखियों बसंत आया है
पीली पीली सरसों खीली,बसंत आया है

स्नेहा काले/ रंगीला बसंत🖋

वसंत के छूने से हुआ हृदय मुलायम मखमली
सुर बसंती मंत्रमुग्ध सुन बांसुरी राधा सा कृष्णमयी

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