उत्तम स्वामी जी: गुरु ने सौंपी 130 वर्ष की शक्तियां

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A desire awakens in mind that its power should be examined

इस उहापोह मे 1 वर्ष टल गया। आखिर रामदास स्वामी ने स्पर्श द्वारा शक्तिपात किया। जैसे ही गुरुजी ने स्वामी जी के भृकुटी मध्य स्पर्श किया स्वामी जी का संपूर्ण शरीर झनझना गया। धरती आसमान घूमने लगे, हजारों सूर्य की रोशनी दिखाई देने लगी। उस प्रकाश में देवताओं के दर्शन हुए शक्ति के प्रभाव से उत्तम 3 दिन तक का अचेत रहा। शिष्य के सामान्य होने के बाद गुरु ने कहा- “मैंने 130 वर्ष की कमाई तुझे सौंप दी है अब तू इसे खा”

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सुयोग्य शिष्य को अपना सब कुछ सौपने के निमित्त ही गुरु जी ने शरीर को रोक रखा था। इतनी सूचना करते हुए की ‘पहाड़ जाकर एकांतवास करते हुए 3 वर्ष साधना करो’ उसी दिन शरीर छोड़ दिया। महासमाधि लेते समय उन्हें संतोष था कि अपनी शक्तियां योग्य उत्तराधिकारी को सौंप दी है। शिष्य की ओर संकेत कर के कहा करते थे कि मेरे पास 6 बैटरी की टॉर्च है जो सदस्य प्रकाश देती है।

गुरुजी अपने पास कोई मूर्ति चित्र अथवा पूजा की सामग्री नहीं रखते थे। शरीर छोड़ने के पूर्व उन्होंने शिष्य को उस स्थान के बारे में बताया जहां देवताओं की नवरत्न की मूर्तियां रखी थी। गुरुजी के निर्वाण के पश्चात स्वामी जी ने उस स्थान पर जाकर उन मूर्तियों को प्राप्त किया।

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130 वर्ष पृथ्वी पर रहने के बाद भी एक मात्र शिष्य के अतिरिक्त गुरु जी ने अपने अस्तित्व का कोई निशान नहीं छोड़ा। उनकी इच्छा भी नहीं थी। मगर शिष्य की इच्छा थी कि गुरु जी का एक छायाचित्र अपने पास हो। कैमरे से कई बार गुरुजी का छायाचित्र लेने की कोशिश की थी। चित्र में बाकी सब कुछ दिखाई देता परंतु चित्र में गुरु जी नहीं होते थे। स्वामी जी ने सोचा कि कम-से-कम हाथ की छाप तो अपने पास रहे। हाथ की चित्र लेने की कोशिश की लेकिन वह भी नहीं आया।
गुरुजी के निर्वाण के 3 दिन बाद की बात है- उत्तम ध्यान कर रहा था ध्यानावस्था में 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन हुए साथ ही अनुभव हुआ कि वह अपने शरीर के बाहर निकल आया है। दूर पहाड़ी क्षेत्र में पहुंच गया है जहां चारों और सुंदर नीला गुलाबी प्रकाश फैला है अन्य कुछ विशेष नहीं है। कुछ समय पश्चात शरीर में वापस लौट आया। शक्तिपात के बाद से ही अनुभव हो रहा था कि संसार की सारी शक्ति उसमें समाहित हो गई है वह कुछ भी कर सकता है शरीर हवा में उड़ता अनुभव तथा निद्रावस्था में भी अनुभव होता कि वह हवा में उड़ रहा है।

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मन में इच्छा जागृत हुई कि अपनी शक्ति की परीक्षा करनी चाहिए। उसे जानकारी मिली कि एक व्यक्ति बहुत अस्वस्थ है। कर्करोग जैसी असाध्य व्याधि से ग्रस्त है। 6 माह से बिस्तर पर पड़े हुए हैं। उत्तम रोगी के घर गया सिरहाने बैठकर उसके माथे पर हाथ रखा रोगी धीरे-धीरे स्वस्थ होने लगा। आधे घंटे के अंदर वह पूर्ण स्वस्थ हो गया।

इस प्रकार गांव का एक युवक 90 दिन से नीम बेहोशी की अवस्था में था। चिकित्सक मान चुके थे कि ठीक होने की संभावना नहीं है। मृत्यु की प्रतीक्षा भर थी। शक्ति प्रयोग का एक अच्छा अवसर मान वे रोगी के परिजनों के साथ पुणे गए और चिकित्सालय जाकर योगी से मिले। रोगी युवक कें भृकुटी मध्य अपने हाथ का अंगूठा लगाया। मरणासन्न ने युवक 15 मिनट में उठ बैठा वह पूर्ण स्वस्थता का अनुभव कर रहा था।

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