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उर्मिला का रंगीला चुनाव अभियान और नाराजी प्रियंका की

Posted on: 28 Apr 2019 18:56 by Surbhi Bhawsar
उर्मिला का रंगीला चुनाव अभियान और नाराजी प्रियंका की

फिल्म रंगीला से रातोरात बॉलीवुड पर छा जाने वाली उर्मिला मातोंडकर का राजनीतिक अंदाज भी निराला है। इसकी झलक उनके चुनाव अभियान पर भी साफ देखी जा सकती है। वे कभी अत्यंत गंभीरता से अपने खिलाफ चुनाव लड़ रहे और पिछला चुनाव चार लाख से भी अधिक अंतर से जीते सांसद गजानंद शेट्टी के बारे में लोगों से कहती हैं मैं इस बात से सहमत हूं कि उन्हें काफी अनुभव है, लेकिन मुझे काफी लोगों का समर्थन हासिल है और उम्मीद है कि इस सफर में वे मेरे साथ रहेंगे, क्योंकि मैं उनके सामने एक फिल्म स्टार के तौर पर पेश नहीं हो रही हूं।

कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फिल्मी अंदाज में मजाक उड़ाते हुए कहती हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीवन पर बनी फिल्म केवल एक मजाक है, क्योंकि उन्होंने अपना कोई वादा पूरा नहीं किया। ५६ इंच के सीने का दावा करने वाले कुछ भी करने में बुरी तरह विफल साबित हुए हैं। उन पर और उनके अधूरे वादों पर तो कॉमेडी फिल्म बननी चाहिए थी। इससे ज्यादा बुरा क्या हो सकता है कि लोकतांत्रिक देश के प्रधानमंत्री ने पांच साल में एक संवाददाता सम्मेलन नहीं किया।

कुल मिलाकर कहानी पूरी फिल्मी ही है। कभी उनका रिक्शा चलाते वीडियो वाइरल होता है तो कभी कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी के ताबड़तोड़ चलते चुनाव में शिवसेना में चले जाने की वजह भी उन्हें लोकसभा के लिए टिकट दिया जाना ही बताया जाता है। बताते हैं कि वे भी इसी सीट से लोकसभा की दावेदारी कर रही थीं, लेकिन आलाकमान ने उनका दावा खारिज ही कर दिया। वैसे उनके कांग्रेस छोड़ देने की एक और वजह मथुरा कांड को बताटा जा रहा है, जिसमें उन्होंने कतिपय कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर ही खराब व्यवहार की एफआईआर दर्ज करा दी थी और इनमें से आठ को पार्टी ने निलंबित भी कर डाला था।

बाद में कांग्रेस के महासिचव ज्योतिरादित्य सिंधिया ने उन्हें वापस पार्टी में ले लिया। हालांकि इससे पहले माफीनामे की औपचारिकता पूरी की गई, लेकिन फिर भी प्रियंका ने इसे प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया। उर्मिला के टिकट के संदर्भ में उनका चार साल पुराना एक ट्वीट फिर से रिट्विट किया जा रहा है। उसमें प्रियंका ने लिखा था- आखिर कैसे एक व्यक्ति सुबह उठता है और अपनी विचारधारा को ऐसे बदल लेता है जैसे कोई कपड़े बदलता है। आखिर प्रियंका ने टिकट पाने के लिए नौ साल तक कांग्रेस में रहकर तपस्या जो की थी और प्रभावी ढंग से चैनलों पर कांग्रेस का पक्ष भी बखूबी रखती रहीं।

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