उज्जैन में बनेगी 790KM की सड़क, संभायुक्त ने ली समीक्षा

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उज्जैन 16 मार्च: उज्जैन संभाग में 17 हजार करोड़ की लागत के प्रोजेक्ट स्वीकृत हैं। इस प्रोजेक्ट के माध्यम से संभाग में 790 किलो मीटर की सड़कें बनाई जायेंगी। इन सड़कों में नौ पैकेज की वे सड़क भी शामिल हैं, जो 10 हजार 400 करोड़ रुपये की राशि से बनाई जायेंगी। इस राशि से संभाग की 244 किलो मीटर की सड़कें बनाई जायेंगी।

244 किलो मीटर की सड़क बनाने हेतु भूमि अधिग्रहण का कार्य प्रगति पर है। अब तक 616 करोड़ की राशि भूमि अधिग्रहण में व्यय की गई है। मात्र 49 करोड़ का ही मुआवजा वितरण शेष है। उक्त जानकारी मंगलवार को आयोजित एनएचआई विभाग की समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने संभागायुक्त संदीप यादव को दी।

संभागायुक्त यादव ने एनएचआई के संभावित प्रोजेक्ट एवं इसमें होने वाली कठिनाईयों की संभागीय समीक्षा की। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि 244 किलो मीटर की सड़क में से 50 किलो मीटर तक की सड़क बना ली गई है। अब तक 790 किलो मीटर में से 480 किलो मीटर तक की सड़कें बनाई जा चुकी है। लगभग 180 किलो मीटर की सड़क अगले वर्ष तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है।

अधिकारियों ने संभागायुक्त को अवगत कराया कि दो प्रोजेक्ट पर तेजी से कार्य किया जा रहा है। इसमें शिप्रा नदी से लेकर देवास एवं उज्जैन को कनेक्ट करती हुई सड़क निर्माण का कार्य शामिल है तथा 41 किलो मीटर की इन्दौर से कनेक्ट करने वाली सड़क शामिल है। इस सड़क के निर्माण से ट्रैफिक की समस्या का निराकरण हो जायेगा।

यह सड़क देवास बायपास से उज्जैन तक पहुंचेगी। 244 किलो मीटर की सड़कों में मंदसौर-रतलाम-झाबुआ मार्ग भी शामिल है। वर्तमान में 60 किलो मीटर तक की सड़क बनाई जा चुकी है। इस स्थान पर फोरलेन निकाली जायेगी, जिससे आमजन को अतिरिक्त सुविधा यातायात के क्षेत्र में मिल सकेगी। बताया गया कि 256 करोड़ रुपये डायवर्शन के मुआवजे में वितरित किये जायेंगे। इसके अलावा 850 करोड़ का प्रोजेक्ट कन्नौद-खातेगांव-हरदा मार्ग का है। यह 47 किलो मीटर की सड़क है। भूमि अधिग्रहण की 34 करोड़ की राशि बांटना शेष है।

अधिकारियों ने बताया कि उज्जैन-झालावाड़ सड़क 455 करोड़ रुपये की राशि से बनाई जानी है। पहले इसे फोरलेन में परिवर्तित करना था, किन्तु अब एक्सप्रेस वे में इसे शामिल किया गया है। बताया गया कि विभिन्न स्थानों पर छोटी-छोटी भूमि अधिग्रहण की, मकान, दुकान एवं पेड़ अधिग्रहण की समस्याएं हैं।

उज्जैन-झालावाड़ मार्ग गरोंठ से शुरू होगा। वर्तमान में इस प्रोजेक्ट की रफ्तार धीमी है। इसे जल्द ही बढ़ाया जायेगा। उज्जैन-बदनावर मार्ग के कार्य में तेजी लाई गई है। उज्जैन-उन्हेल-नागदा-जावरा-पेटलावद मार्ग निर्माण की कार्य योजना बना ली गई है। जिन सड़कों के प्रोजेक्ट पर काम किया जा रहा है, उन्हें बारिश से पहले यथासंभव पूरा करने का प्रयास किया जायेगा। बताया गया कि 870 करोड़ रुपये की राशि के भूमि अधिग्रहण में अवार्ड पारित होना शेष है।

अवार्ड वेरिफिकेशन में बटांक एवं टाईम की दिक्कतें आ रही है। इनकी वजह से निर्माण कार्य में देरी हो रही है। अतिक्रमण हटाने, अनुमति लेने, वेरिफिकेशन करने में अतिरिक्त समय लग रहा है। संभागायुक्त ने निर्देश दिये कि राजस्व विभाग अतिक्रमण हटाने का कार्य प्राथमिकता से करेगा। बताया गया कि इन्दौर-करनावद-देवास रोड में भी अवार्ड पारित होना है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों ने बताया कि सरकोटा-देवास मार्ग में भूमि अधिग्रहण की राशि हितग्राहियों को दी गई है, लेकिन अभी तक भूमि का पजेशन नहीं मिला है। संभागायुक्त ने बताया कि फोर्सफूल ढंग से भूमि का अधिग्रहण करने की आवश्यकता है।

उन्होंने सम्बन्धित एसडीएम को निर्देश दिये कि जब मुआवजा वितरण हो चुका है तो जमीन का आधिपत्य भी मिले। अधिकारियों ने बताया कि कुछ जगह पर कॉन्ट्रेक्टरों के कार्य न करने के कारण कार्य लम्बित चल रहे हैं। उज्जैन-गरोंठ मार्ग में 13 किलो मीटर तक बायपास बनाने का प्रस्ताव स्वीकृत है। बताया गया कि निजी जमीन के अधिग्रहण की शक्ति कलेक्टर में निहित है। बैठक में उपस्थित कलेक्टर श्री आशीष सिंह ने राष्ट्रीय राजमार्ग के अधिकारियों को टीएल बैठक में आने के निर्देश दिये, ताकि सड़क निर्माण से सम्बन्धित सभी समस्याओं का निराकरण प्राथमिकता से किया जा सके।

बैठक में राष्ट्रीय राजमार्ग के समस्त संभागीय अधिकारी उपस्थित थे।