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उम्मीद और राहत से भरे दो दिन, राजेश बादल की टिप्पणी

Posted on: 24 May 2018 04:56 by Ravindra Singh Rana
उम्मीद और राहत से भरे दो दिन, राजेश बादल की टिप्पणी

दो दिन इंदौर में था। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय की स्नातकोत्तर कक्षाओं के मौखिक परीक्षक की भूमिका में । आमतौर पर विश्वविद्यालयों के मीडिया पाठ्यक्रम मुझे बहुत रुचते नहीं। आज जिस तरह चैनल चल रहे हैं,रेडियो चल रहे हैं और समाचारपत्र निकल रहे हैं उनकी व्यावहारिक समझ और तरीक़ा छात्रों को संप्रेषित करने में ये पाठ्यक्रम बहुत कारगर नहीं हैं । कम से कम मुझे तो नहीं लगते ।इसके बाद भी आशा की कुछ किरणें चमक जाती हैं।

मुझे लग रहा था कि अन्य विश्वविद्यालयों जैसा अनुभव यहां भी होने वाला है। लेकिन राहत की बात है कि ऐसा कुछ नहीं हुआ ,बल्कि कुछ छात्रों से बात करके इस पेशे के भविष्य को लेकर बड़ी उम्मीदें जगीं। जब छात्र आपसे तकनीकी ज्ञान और कंटेंट को लेकर अपने द्वंद्व को शेयर करें और मीडिया इंडस्ट्री की तमाम विद्रूपताओं के बावजूद इस प्रोफेशन में बहने वाले आनंद के झरने को अपने भीतर बहता महसूस करें तो सचमुच दिल में ठंडक पहुँचती है। ठीक है – सौ फ़ीसदी छात्र ऐसे नहीं होते ,लेकिन एक बैच में साठ प्रतिशत बच्चे इस तरह के हों तो आप निश्चिन्त हो सकते हैं।

दूसरी बात -अध्यापक इसमें बड़ी भूमिका निभाते हैं। नित नई टेक्नॉलॉजी से अपने को जोड़कर ,खुद को अपडेट करते हुए जब छात्र और अध्यापक के रिश्ते का रसायन घुलता है तो एक नया यौगिक बनता है। डॉक्टर जयंत सोनवलकर को मैंने ऐसे ही शिक्षक के रूप में देखा। पत्रकारिता उनका मूल विषय नहीं है लेकिन उन्होंने खुद को खोकर पत्रकारिता विभाग में नया आकार लिया है | वैसे उनके परिवार की परंपरा में पत्रकारिता है। एक ज़माने में हम लोग टाइम्स ऑफ इण्डिया में दिनकर सोनवलकर को पढ़ते थे। उनकी कविताएँ हिंदी साहित्य को अदभुत देन है ।अफ़सोस ! बड़ी जल्दी वो हमारे बीच से चले गए । कभी उनकी कविताओं पर अलग से लिखूँगा। इस परिवार के एक और सदस्य संदीप सोनवलकर मेरे छात्र रहे हैं और बरास्ते भोपाल ,दिल्ली इन दिनों मुंबई में शानदार पत्रकारिता कर रहे हैं ।

तो बात हो रही थी जयंत सोनवलकर की। प्रयोगधर्मी जयंत भाई ने विभाग में अत्यंत सीमित संसाधनों में वीडियो कांफ्रेंसिंग की शुरुआत कर डाली । संभवतया मध्यप्रदेश में यह पहला विभाग है जो बाहर के शिक्षकों को इस तकनीक के ज़रिए छात्रों से जोड़ता है। लोकसभाध्यक्ष और इंदौर की ताई सुमित्रा महाजन ने बीते दिनों इसकी शुरुआत की थी। बधाई जयंत भाई ।

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