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TV9 भारत चैनल ने सांसदों को स्टिंग ऑपरेशन से कैसे नंगा किया | TV9 India Channel How MPs Have Nude From Sting Operation

Posted on: 04 Apr 2019 09:57 by shivani Rathore
TV9 भारत चैनल ने सांसदों को स्टिंग ऑपरेशन से कैसे नंगा किया | TV9 India Channel How MPs Have Nude From Sting Operation

नवोदित चैनल ‘टी वी 9 भारत वर्ष’ का यह देश आभारी रहेगा। इस चैनल से जुड़े अजित अंजुम, विनोद कापड़ी और उनके सहयोगियों को विशेष तौर पर बधाई ! टी वी 9 ने हमारे देश की राजनीति में दशकों से भीतर -भीतर पल रही भीषण गंदगी को एक बार फिर बाहर ला दिया है। चैनल के स्टिंग आपरेशन में विभिन्न दलों के कई सांसद ‘नंगे’ हो रहे हैं। वे करोड़ों की रिश्वत लपकने को तैयार दिखाई पड़ रहे हैं। सदेह ! पूरी बेशर्मी के साथ ! देश शर्मिंदा है कि हमारे लोकतंत्र के मंदिर में ऐसे -ऐसे सांसद भी हैं जो पैसे के लिए किसी भी हद तक नीचे जा सकते हैं ! देश को भी बेच सकते है ! आज स्थिति यह हो गई कि कोई अनजान व्यक्ति भी भारी पैसे के प्रलोभन के साथ किन्हीं दस सांसदों से मिले तो उन में से नौ सांसद की जीभ से लाऱ टपकने लगेगी।

नब्बे के दशक में चर्चित जैन हवाला रिश्वत कांड में भी यही हुआ था। जैन बंधु कश्मीरी आतंकवादियों के लिए हवाला के जरिए पैसे मंगवाने का धंधा भी करता था।जाहिर है कि वह देशद्रोह का धंधा था।उन्हीं पैसों में से उसने प्रधान मंत्री,केंद्रीय मंत्री, मुख्य मंत्री,सांसद स्तर के दर्जनों नेताओं के यहां लाखों-करोड़ों रुपए पहुंचा दिए।उन नेताओं में कम्युनिस्टों को छोड़कर लगभग सभी दलों के नेता शामिल थे।उन नेताओं ने उन जैन बंधुओं से यह नहीं पूछा कि तुम किस खुशी में ये पैसे हमें दे रहे हो ? दरअसल जैन बंधुओं का छिपा उद्देश्य यह था कि यदि आतंकियों को पैसे पहुंचाने के क्रम में उसके सामने कोई पुलिसिया -कानूनी बाधा आए तो ये नेता लोग उसे साफ बचा लें।एक बार बचा भी लिया था,ऐसी खबर आई थी। पर उस हवाला कांड के आरोपित भी इस देश के सिस्टम द्वारा साफ बचा लिए गए।

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अब तो लगता है कि अत्यंत थोड़े से सांसद ही ईमानदार बच गए हैं जिन्हें कोई भी रकम डिगा नहीं सकती।  ऐसा इसलिए भी हो रहा है कि इस तरह के ही पिछल पापों के लिए संसद या अदालत इन्हें सबक सिखाने लायक सजा नहीं दे पायी। अदालत के हाथ तो संविधान ने बांध रखे हैं।संबंधित अनुच्छेद में संशोधन की सख्त जरूरत है।पर इस देश की भ्रष्ट राजनीति(Politics) वह संशोधन नहीं कर रही है।

डेढ़ दशक पहले का ऐसा ही एक स्टिंग आपरेशन
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23 दिसंबर, 2005 को इस देश की संसद ने प्रस्ताव पास कर अपने 11 सदस्यों की सदस्यता समाप्त कर दी थी। पर ऐसे लोगों को सबक सिखाने लायक सख्त सजा का प्रावधान करने पर किसी ने नहीं सोचा। उन सभी पर सदन में प्रश्न पूछने के लिए पैसे लेने का आरोप था। स्टिंग आपरेशन के तहत उन्हें कैमरे पर पकड़ा गया था।चूंकि कैमरे पर पकड़े गए थे,इसलिए अन्य सांसदों को शर्म आई अन्यथा उसमें भी कोई कार्रवाई नहीं होती। सदन की सदस्यता से उन्हें निकाल देना काफी साबित नहीं हुआ। बाद में ऐसे ही स्टिंग आपरेशन से संबंधित खबर रिपब्लिक टी.वी.ने दी है।तीन सांसद घूस मांग रहे थे।

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उससे पहले नब्बे के दशक में झारखंड मुक्ति मोर्चा के चार सांसदों ने नरसिंह राव सरकार को गिरने से बचाने के लिए भारी रिश्वत ली थी।सांसद क्षेत्र विकास फंड से अधिकतर सांसद लगातार कमीशन यानी घूस ले रहे हैं। कुछ ही सांसद नहीं लेते।यदि वहां भी सही ढंग से स्टिंग आपरेशन सफल हो जाए और उन्हें जेल भेज दिया जाए या सदन से निकाल दिया जाए तो एक दिन संसद लगभग खाली हो जाएगी। याद रहे कि स्टिंग आपरेशन के बाद तो सदस्यता खत्म हो जाती है,पर चुपचाप घूस लेते रहने पर नहीं।हालांकि खबरें सबको रहती है कि अनेक सांसद तरह -तरह के मद में लगातार घूस ले रहे हैं।

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क्योंकि स्टिंग के बाद दलीय नेता भी जनता को मुंह दिखाने लायक नहीं रह जाते ,इसलिए दोषी सांसद सदन से निकाल दिए जाते हैं।पर चोरी -छिपे जो कुछ हो रहा है,उस पर राजनीतिक दल चुप रहते हैं।यह सब लोकतंत्र के लिए बहुत बड़ा कलंक है।जब अधिकतर सांसद ही घूस रहे हैं तो अफसर व सरकारी कर्मचारी क्यों नहीं लेंगे ?अपने- अपने हिस्से के लिए ही ऑफिस जाते हैं। बिहार में कहा जाता है कि सरकारी कर्मचारी ऑफिस जाने के लिए वेतन लेते हैं और काम करने के लिए घूस।हालांकि कुछ सरकारी कर्मचारी ईमानदार भी हैं।

इस तरह घूसखोरी इस देश की राजनीतिक-प्रशासनिक कार्यपालिका की ‘जीवन शैली’ बन चुकी है। क्या घूस लेते पकड़े जाने पर किसी सांसद को हमेशा के लिए चुनाव लड़ने से रोक देने का कभी कानून बनेगा ? घूसखोर सांसदों पर आपराधिक मुकदमे चलेंगे ? पता नहीं।  यदि इन सांसदों के खिलाफ सबक सिखाने लायक कड़ी कार्रवाई नहीं होगी तो स्टिंग आपरेशनों के साथ लोकतंत्र घिसट -घिसट लंगड़ाते हुए कुछ दशकों तक ही चलेगा। और एक न एक दिन कोई तानाशाह इस तथाकथित लोकतंत्र को ही खत्म कर देगा।

—-वरिष्ठ लेखक सुरेंद्र किशोर

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