गरीबी नहीं आई आड़े, IIT में एडमिशन लेगा आदिवासी किसान का बेटा

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नई दिल्ली: कुछ लोग कहते है गरीब का बच्चा कभी बड़ा आदमी नहीं बन सकता, वह अच्छे स्कूल या कोई डिग्री नहीं ले सकता। ऐसी सोच रखने वालों को गुजरात के रहने वाले 17 साल के एक बच्चे ने करारा जवाब दिया है। गरीब, अनपढ़ आदिवासी किसान के 11 बच्चों में से एक बच्चा इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, दिल्ली में पढ़ाई करने जा रहा है।

इस गरीब आदिवासी किसान का बेटा अविराज चौधरी ना केवल अपने परिवार का बल्कि पूरे गांव का पहला ऐसा बच्चा है जो दिल्ली में पढ़ाई करने जा रहा है। 17 साल के अविराज चौधरी गुजरात के डांग जिले में रहते हैं। वह अपने जिले के पहले ऐसे छात्र है जो IIT दिल्ली में पढ़ाई करेंगे।

अविराज पांच भाई और पांच बहनों में सबसे छोटे है। अविराज जेईई एडवांस परीक्षा पास कर जल्द ही प्रमुख प्रौद्योगिकी संस्थान में टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी इंजीनियरिंग कोर्स में शामिल होने जा रहे हैं। वह जहां रहते है वहां पर्याप्त सुविधा नहीं है। वह कच्चे घर में रहते हैं जहां उनकी मां अभी भी खाना बनाने के लिए लकड़ियों का इस्तेमाल करती हैं।

प्रशासन ने किया सम्मानित

अविराज की इस उपलब्धि ने उन्हें और उनके पूरे परिवार को ध्यान में ला दिया है। जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) मगन भुसारा और जिला कलेक्टर एन के डामोर ने शुक्रवार को अविराज को जेईई एडवांस परीक्षा पास करने और आईआईटी दिल्ली में प्रवेश पाने के लिए सम्मानित किया।

माता-पिता इस बारे में नहीं जानते

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ अविराज ने बताया कि उनके माता-पिता आईआईटी के बारे में नहीं जानते, उन्हें केवल इतना पता है कि उनका बेटा दिल्ली में पढ़ाई करने जा रहा है। जैसे ही उन्हें इस बारे में पता चला कि मैं दिल्ली जा रहा हूं मेरे माता- पिता और मेरा परिवार बहुत खुश हुआ।

राज्य रिजर्व पुलिस में है एक भाई

अविराज के पांच भाइयों में से एक भाई भरतिया चौधरी ने आर्ट्स स्ट्रीम से ग्रेजुएशन की है और राज्य रिजर्व पुलिस में काम करते हैं। फिलहाल वह वलसाड जिले में तैनात हैं। वहीं एक और भाई रामुभाई चौधरी ने भी आर्ट्स स्ट्रीम से ग्रेजुएशन किया है वह एक प्राइवेट फर्म में नौकरी करते हैं। इसके अलावा बाकी भाई खेती में हाथ बंटाते है।

गांव के स्कूल से की पढ़ाई

अविराज ने अपनी प्राथमिक शिक्षा गांव के स्कूल से की। इसके बाद उन्होंने मालेगांव के संतोकबा ढोलकिया विद्या मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में दाखिला लिया। 9वीं से 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई के दौरान वह स्कूल के हॉस्टल में ही रहते थे। ये आश्रम स्कूल हीरा व्यापारियों और सूरत के अन्य पाटीदार समुदाय के व्यापारियों द्वारा चलाया जाता है। वहीं अविराज का नामांकन एक प्राइवेट कोचिंग सेंटर में हुआ, जिसके बाद उनकी पढ़ाई का सारा खर्चा स्कूल ही उठाता।

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