देश के जाने माने कवि प्रदीप चौबे को श्रद्धांजलि | Tribute to Famous Poet Pradeep Choubey of the Country

0
77

प्रसिद्ध कवि प्रदीप चौबे अब हमारे बीच नहीं रहे उनकी एक चर्चित कविता हम अपने पाठकों के लिए यहां दे रहे हैं उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि

#प्रदीपचौबेजीकोविनम्र_श्रद्धान्जली

हर तरफ गोलमाल है साहब
आपका क्या ख़याल है साहब

कल का ‘भगुआ’ चुनाव जीता तो,
आज ‘भगवत दयाल’ है साहब

लोग मरते रहें तो अच्छा है,
अपनी लकड़ी की टाल है साहब

आपसे भी अधिक फले-फूले
देश की क्या मजाल है साहब

मुल्क मरता नहीं तो क्या करता
आपकी देख भाल है साहब

रिश्वतें खाके जी रहे हैं लोग
रोटियों का अकाल है साहब

जिस्म बिकते हैं, रूह बिकती हैं,
ज़िंदगी का सवाल है साहब

आदमी अपनी रोटियों के लिए
आदमी का दलाल है साहब

इसको डेंगू, उसे चिकनगुनिया
घर मेरा अस्पताल है साहब

तो समझिए पात-पात हूं मैं,
वे अगर डाल-डाल हैं साहब

गाल चांटे से लाल था अपना
लोग समझे गुलाल है साहब

मौत आई तो ज़िंदगी ने कहा-
‘आपका ट्रंक काल है साहब’

मरता जाता है, जीता जाता है
आदमी का कमाल है साहब

इक अधूरी ग़ज़ल हुई पूरी
अब तबीयत बहाल है साहब ।।

-प्रदीप चौबे

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here