सेना की ऐसी ट्रेनिंग, जिसमें खाना पड़ते है सांप और बिच्छु

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नई दिल्ली: सेना का जवान यूं ही सीमा पर खड़ा होकर देश की रक्षा नहीं करता। वह जवान हमारे देश का वो या किसी भी देश का। उसे हर मोर्चे को संभालने के लिए हर समय तैयार रहना होता है। सीमा पर खड़े होने से पहले उसे कई कड़ी ट्रेनिंग और कठिनाइयों से गुजरना पड़ता है। इन सब ट्रेनिंग में से एक है विश्वस्तरीय परीक्षण कोबरा गोल्ड।

कोबरा गोल्ड परिक्षण एशिया में होने वाले सबसे बड़े फौजी अभ्यास में से एक है। थाईलैंड के तटीय इलाकों में हर साल इस अभ्यास में अमेरिका, थाईलैंड और अन्य देशों के कमांडोज शामिल होते हैं। इसमें 10 दिनों तक कमांडोज विषम परिस्थितियों में खुद को जीवित रखने की ट्रेनिंग लेते है।

इस तरह के परिक्षण में कमांडोज को सांप का खून पीना और बिच्छु खाने की ट्रेनिंग दी जाती है। कमांडोज कोबरा का सिर काटकर उसका खून पीते है। इसके अलावा, उसके शरीर को खाने में इस्तेमाल किया. ट्रेनिंग में थाईलैंड के मिलिट्री ट्रेनर्स भी मौजूद रहते है।

इतना ही नहीं इस परिक्षण में कमांडोजको ये भी सिखाया जाता है कि बिच्छुओं और सांपों को खाने से पहले उनमें से विषैली थैलियों को कैसे हटाया जाए। सैनिकों को जंगल में खाने लायक पौधों की पहचान करने और पीने के लिए पानी ढूंढने की ट्रेनिंग भी दी जाती है। ट्रेनिंग के दौरान थाई अफसरों ने बताया कि जंगलों में जीने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी यह जानना है कि क्या खाना है और क्या नहीं?

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