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नंबर वन शहर के कुत्ते! कीर्ति राणा की कलम से

Posted on: 22 Sep 2018 10:14 by Ravindra Singh Rana
नंबर वन शहर के कुत्ते! कीर्ति राणा की कलम से

बस थोड़े ही दिनों में हम आवारा कुत्तों की वजह से भी देश में नंबर वन बनने वाले हैं ।शायद इसीलिए नगर निगम तंग बस्तियों से लेकर कॉलोनियों तक में इन्हें पूर्ण आजादी दिए हुए है।शहर के सिर्फ लाल अस्पताल का आंकड़ा है कि मात्र बीस दिन में सिर्फ ढाई हजार लोगों पर दंत-दस्तखत किए हैं, इनमें दो-चार मीडिया मित्र भी हैं।बस उसी दिन से इन मीडियावालों ने इंदौर की प्रथम नागरिक का मूड बिगाड़ रखा है चाहे जहां मशीनगन की तरह कैमरा तान कर रोक लेते हैं, उनका तैश में आना भी स्वाभाविक है कुत्ते द्वारा काट जाने की खबर बनना चाहिए क्या, खबर तो तब बनना चाहिए जब इंसान कटखना होकर कुत्तों पर लपके ! निगमायुक्त से क्यों पूछा जाना चाहिए कि आवारा कुत्तों से निजात दिलाने के लिए क्या किया जा रहा है।ऐसा तो है नहीं कि वीआयपी इलाके रेसीडेंसी, साकेत नगर में कुत्ते नहीं है।यहां तो अंदर आज्ञाकारी भी हैं और बाहर उत्पाति भी।

मुझे तो कई बार लगता है कि ये कुत्ते भी वर्गभेद की भावना का शिकार हैं।आज तक नहीं सुना कि किसी महापौर-विधायक-सांसद-आयएएस-करोड़पति को अपना निशाना बनाया हो।उन रसूखदारों को तो अपने दांत दिखाने की हिम्मत है नहीं इनमें, साहस दिखाएंगे भी तो इतना कि या तो टांग ऊंची कर के इनके वाहनों के टायर गीले कर देंगे या कुछ देर गाड़ियों के पीछे भौंकते-लपक लेंगे।ऊंची गाड़ियों में बैठकर गर्दन यूं ही और ऊंची हो जाती है।आमजन की परेशानियां वैसे ही नजर नहीं आती तो शीशे चढ़ी गाड़ी के पीछे लपकते-भौंकते कुत्ते कैसे दिखाई देंगे। जिन्हें तरक्की के लिए हर तरह के हथकंडे अपनाने में शर्म नहीं वो श्रेष्ठी वर्ग तो वैसे भी नीचे वालों को कुत्तों से भी गया गुजरा मानता है।

हमें तो खुश होना चाहिए कि नगर निगम का अमला स्वच्छ शहर के दोहरे खिताब के बाद अपने इंदौर को आवारा कुत्तों के मामले में भी नंबर वन बनाने के लिए कुत्तों पर भरोसा कर रहा है। वो तो निगमायुक्त के अमले को भी रेसीडेंसी इलाके में उस दिन बेवजह मुस्तैदी दिखानी पड़ी जब लोग इन कुत्तों की मनमानी के खिलाफ प्रदर्शन करने पहुंच गए।निगम को बद्दुआ देने वाले लोग इस गणित को समझ ही नहीं पा रहे हैं कि देश में आवारा कुत्तों के मामले में अभी तक वो कलकत्ता नंबर वन बना हुआ है जहां ममता बैनर्जी का राज है और इस माया मुक्ति के लिए अमित शाह ने अपने नंबर वन शहर के कैलाश विजयवर्गीय को लगा रखा है।

बताओ जब से मालिनी गौड़ महापौर बनी हैं, इस खेमे से उनकी पटी है क्या? नहीं पटी ना।अब पहली बार तो महापौर खेमे को मौका मिला है कलकत्ता से नंबर वन का खिताब झपट कर नीचा दिखाने का। एक मनीष सिंह ने ही तब साथ दिया था, इस शहर ने तो इतने बरसों में इस उठापटक में साथ दिया नहीं।आवारा कुत्ते जब इस मामले में साथ दे रहे हैं तो मीडिया बेमतलब खलनायक बन रहा है, मुझे तो जाने क्यों अंदेशा हो रहा है कि वो सिखाए हुए कुत्ते ही होंगे जिन्होंने मीडियाकर्मियों को निशाना बनाया।रोज नगर निगम की आरती उतारो, स्मार्ट होते शहर का बखान करो और नंबर वन इंदौर के इन कुत्तों के न फोटो, न बाइट लो तो फिर उन्हें भी लाइम लाइट में आने की अदा मालूम है।

शहर का कोना-कोना साफ कर दिया, कचरे-जूठन के ढेर पर दंड लगा दिया, होटलों के आसपास गंदगी पर जुर्माना करने लग गए तो ये बेचारे कहां टाइम पास करें? भूखो मर रहे कुत्ते करे तो क्या करें? दयालु मेनका गांधी ने भी आजतक कटखने हो रहे कुत्तों से राहत का हल नहीं बताया।अपने यहां रोज लोग शिकार हो रहे, अस्पतालों में रेबीज के इंजेक्शन आसानी से मिल नहीं रहे दूसरी तरफ नगर निगम का मजाकिया जवाब है हम तेजी से कुत्तों की नसबंदी कर रहे हैं।अरे भिया, नसबंदी से क्या काटना बंद कर देंगे।

Kirti-Rana

कीर्ति राणा

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