आज है करवा चौथ का व्रत, जानिए शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

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करवा चौथ का व्रत इस साल और भी ज्यादा खास होने वाला है। भारतीय महिलाओं में करवा व्रत का उत्साह जोरों पर रहता है। इस वर्ष चतुर्थी 17 अक्टूबर गुरुवार को पड़ रही है, इस व्रत को सबसे ज्यादा कठिन माना जाता हैं। इस व्रत की पूजा विधि और शुभ मुहूर्त-

इस दिन सुबह जल्दी स्नानादि करने के पश्चात व्रत का संकल्प करें । व्रत के पूरे दिन निर्जला रहें। दीवार पर गेरू से फलक बनाकर पिसे चावलों के घोल से करवा चित्रित करें। इसे वर कहते हैं। चित्रित करने की कला को करवा धरना कहा जाता है। आठ पूरियों की अठावरी बनाएं के साथ हलुआ बनाएं और पकवान बनाएं। पीली मिट्टी से गौरी बनाएं और उनकी गोद में गणेशजी बनाकर बिठाएं।

इसके बाद गौरी को लकड़ी के आसन पर बिठाएं। चौक बनाकर आसन को उस पर रखें। गौरी को चुनरी ओढ़ाएं। बिंदी आदि सुहाग सामग्री से गौरी का श्रृंगार करें। अब जल से भरा हुआ लोटा रखें। भेंट देने के लिए मिट्टी का टोंटीदार करवा लें। करवा में गेहूं और ढक्कन में शक्कर का बूरा भर दें। उसके ऊपर दक्षिणा रखें। अब रोली से करवा पर स्वस्तिक बनाएं।

गौरी-गणेश और चित्रित करवा की परंपरानुसार पूजा करें। पति की दीर्घायु की कामना करें। करवा पर 13 बिंदी रखें और गेहूं या चावल के 13 दाने हाथ में लेकर करवा चौथ की कथा कहें या सुनें कथा सुनने के बाद करवा पर हाथ घुमाकर अपनी सासुजी के पैर छूकर आशीर्वाद लें और करवा उन्हें दे दें। तेरह दाने गेहूं के और पानी का लोटा या टोंटीदार करवा अलग रख लें। रात्रि में चन्द्रमा निकलने के बाद छलनी की ओट से उसे देखें और चन्द्रमा को अर्घ्य दें। इसके बाद पति से आशीर्वाद लें। उन्हें भोजन कराएं और स्वयं भी भोजन कर लें।

व्रत का शुभ मुहूर्त

करवा चौथ के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 50 मिनट से 7 बजकर 6 मिनट तक रहेगा। ज्योतिषियों के अनुसार करवा चौथ का व्रत सुबह 6 बजकर 21 मिनट से रात 8 बजकर 18 मिनट तक माना जा रहा है, जिससे उपवास का समय 13 घंटे, 56 मिनट रहेगा। ज्योतिषियों के अनुसार चांद निकलने का समय रात 8 बजकर 18 मिनट पर रहेगा।

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