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एससी/एसटी एक्ट सुप्रीम कोर्ट ने भी तो यही कहा था: शिवराज

Posted on: 22 Sep 2018 12:42 by Ravindra Singh Rana
एससी/एसटी एक्ट सुप्रीम कोर्ट ने भी तो यही कहा था: शिवराज

हमारे नेता वाकई जनता को निरामूर्ख समझते हैं और मीडिया तो गोदी में बैठा ही है और सोशल मीडिया पर जड़-बुद्धि भक्तों का जमावड़ा है… एससी/एसटी एक्ट के मामले में कांग्रेस-भाजपा सहित सभी दल भ्रामक बयानबाजी करते आए हैं… इसी कड़ी में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने प्रदेशभर में फैले सवर्ण आक्रोश को शांत करने के लिए यह बयान दिया कि एससी/एसटी एक्ट का दुरुपयोग नहीं होने दिया जाएगा और बिना जांच गिरफ्तारी नहीं होगी।

अब मुख्यमंत्री का यह बयान हास्यास्पद इसलिए कहा जाएगा क्योंकि यही बात सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने आदेश में कही थी, जिसका राजनीतिक दलों ने विरोध किया और ताबड़तोड़ संसद से सुप्रीम कोर्ट के आदेश को अप्रभावी बनाने का अध्यादेश पारित करवा दिया, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने एससी/एसटी एक्ट पर कोई व्याख्या ही नहीं की थी, सिर्फ सीआरपीसी को लेकर व्यवस्था दी थी, ताकि किसी बेगुनाह को सजा न मिल सके, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश को गलत तरीके से राजनीतिक दलों के साथ-साथ मीडिया ने परोसा, जिसके चलते दलित समुदाय भड़का और वोट बैंक की राजनीति के चलते सुप्रीम कोर्ट के आदेश को पलटने का पाप किया गया।

 हालांकि अभी सुप्रीम कोर्ट फिर से इस मामले की सुनवाई करेगा, मगर सवाल यह है कि जो बात तब सुप्रीम कोर्ट ने कही थी, वही बात अभी शिवराज जी दोहरा रहे हैं, तो फिर उनकी पार्टी ने संसद के जरिए सुप्रीम कोर्ट आदेश को पलटने का निर्णय क्यों लिया और तब शिवराज जी क्यों खामोश रहे..? हकीकत यह भी है कि शिवराज के ट्वीट कर देने या मीडिया में बयान दे देने से ही संसद से पारित एक्ट नहीं बदल जाता और कानूनी रूप से ऐसे बयानों का कोई मतलब भी नहीं है।

कानूनविदों का दो टूक कहना है कि जिस विधेयक को पहले संसद और फिर राष्ट्रपति ने हस्ताक्षर से कानून बना दिया, उसमें मुख्यमंत्री की घोषणा कोई मायने नहीं रखती… इसके लिए मध्यप्रदेश सरकार को स्टेट एमेंटमेंट लाकर एससी/एसटी कानून के पर्टिक्यूलर सेक्शन में बदलाव करना पड़ेगा, जो कि न तो संभव है और न मुख्यमंत्री के बूते का, क्योंकि अब उनके बयान के बाद दलित समुदाय भड़कने लगा है… कुल मिलाकर इन नेताओं ने वर्ग संघर्ष की घातक स्थिति निर्मित कर दी है और अब चुनावी बयानबाजी कर भ्रम अलग फैला रहे हैं।

@ राजेश ज्वेल

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