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मर जाने के लिये ,रविवार की सुबह से बुरा वक्त नही हो सकता, मुकेश नेमा की टिप्पणी

Posted on: 16 May 2018 03:31 by Ravindra Singh Rana
मर जाने के लिये ,रविवार की सुबह से बुरा वक्त नही हो सकता, मुकेश नेमा की टिप्पणी

मर जाने के लिये ,रविवार की सुबह से बुरा वक्त नही हो सकता ,यार दोस्त ,रिश्तेदारों की छुट्टी बिगाड़ने की वजह भर से आपके लिये नर्क के दरवाज़े खुल सकते है ,खुल क्या सकते हैं ,खुले ही मिलेंगे आपको ,नर्क के कर्मठ कर्मचारी प्राईवेट सेक्टर के कर्तव्यनिष्ठ बंदो के टाईप के होते हैं ,केवल यहीं हैं जो नौकरी चले जाने के डर से छुट्टी के दिनो मे भी काम करते रहते है !

आप तो मर कर फुरसत हो लेगें पर आपके बच्चो का क्या ! आजकल वैसे भी कंधो पर ले जाने लायक बंदे जुटाना मुश्किल हो चला है ! छुट्टी के दिन तो शव वाहन का ड्राईवर तक भुनभुनाता है ! अंतिम संस्कार करवाने वाले पंडित जी बच्चो को लेकर भेडाघाट की तरफ निकले होते हैं ! जाहिर है छुट्टी के दिन मरकर आप मरने के बाद भी अपने बच्चो के लिये आफत की वजह बनेगें ! ऐसे मे सोच समझ कर मरना हमेशा अच्छा होता है !

छुट्टी के दिन मरेगें ,लोग जुटेंगे नही मैय्यत में ,और जो नही आयेगें ,वे ही बतायेंगे कि आप निहायत सूमड और सिर्री टाईप की चीज़ थे ,कही आते जाते नही थे ,ग़ैर मिलनसार थे ,इसलिये आपकी शवयात्रा मे कम भीड़ जुटी ,हमारे देश मे कामकाजी से ज़्यादा ग़ैर कामकाजी लोग छुट्टी ख़राब होने पर बुरा मान जाते हैं ! छुट्टी के दिन मरना बेवजह गाली खाने की हरकत है ,और मुझे उम्मीद है गाली खाना आपको भी पसंद नही होगा !

और फिर किसी शरीफ आदमी की सरकारी छुट्टी बिगाड कर मिलेगा क्या आपको ! हमारे मिडिल क्लॉसो के यहाँ कोई नौकरो की बाराते तो होती नहीं ! बीबी की फरमाईशो ,बच्चो की जरूरते ,खुद के हेयर कट जैसे जरूरी मामलो के लिये इजाद की गई हैं छुट्टियाँ ! ऐसे मे आप गलत दिन मर जायेगें तो कौन इज्जत करेगा आपकी ! मै मानता हूँ मरना तो पडता ही है आदमी को पर अपनी इज्जत बचाने की खातिर ,देख सुन कर मरने मे कोई हर्ज है नही !

खुदा ना खास्ता आप बड़े आदमी ,मंत्री टाईप की चीज़ हैं तब तो आपको और सावधान रहने की ज़रूरत है ,ऐसा करने से आपको ,सरकारी बाबुओं की आह लगने की ग्यारंटी है ,सीधी सी बात है आप सोमवार को या और किसी कामकाजी दिन सिधारेगे तो सारे सरकारी बंदे जो आपको ,आपके बीमार होने के दिन से ही उम्मीद भरी निगाहों से तके बैठे थे ,आप मे एक एक्स्ट्रा छुट्टी देखने लगे थे ,बहुत निराश होगें ,सरकारी बाबू निराश होते ही दुखी हो जाता है ,दुखी होगा तो नाराज़ भी होगा,चूँकि आप मर चुके है ,इसलिये अब आप इस स्थिति मे है कि अब सरकारी आदमी आपका कुछ बिगाड़ नही सकता ,नाराज़ सरकारी आदमी ऐसे मौक़े पर अपने दिल का इस्तेमाल करता है ,वैसे तो सरकारी आदमी अपने दिल का गाहे बगाहे की इस्तेमाल करता है ,और जब करता है तो केवल बद्दुआएँ देने के लिये ही करता है ,और आप को पता होना चाहिये ,सरकारी कर्मचारी की बद्दुआ बहुत घातक क़िस्म की होती है !

इसलिये मरने मे सावधानी बरते ,दूसरे ,चौथे शनि को ,इनके अगले दिन तो हरगिज ना मरें ! मरने के लिये मंगल से गुरू तक कोई भी दिन चुन सकते हैं आप ! शुक्र या सोम को मरेगें तो कुछ एकस्ट्रा दुआयें हासिल हो सकती हैं आपको ! और फिर भी खुदा ना खास्ता छुट्टी के दिन ही मरने की नौबत आ जाये तो पहले ही वसीयत कर जायें ,बता जाये बच्चों को कि रविवार को टालें , भले ही वैन्टीलैटर पर पर उन्हें कुछ फालतू खर्च करना पड़े ,मरते वक्त भी लोगो को निराश करने से ,उनकी बद्दुआएँ लेने से यह ज़्यादा अच्छा होगा !

सोचकर देखें ! जीते जी तो आप कभी पब्लिक के कुछ काम आ नही सके हैं ! आपको पता नही चलता पर सही बात तो यही है कि रोज बोरा भर के बद्दुआयें आपके खाते मे जमा हो रही हैं ! ऐसे मे किसी वर्किंग डे मे मर कर आप लोगो को थोडी बहुत खुशियाँ तो देकर जा ही सकते हैं !

हिंदुस्तानी सरकारी बाबू प्राण प्रण से छुट्टी की कामना करता है ! हर नामी गिरामी बुजुर्ग राजनेता उसे एक छुट्टी से ज्यादा कुछ नही दिखता ! यदि आप सत्ता पक्ष से है तब तो वह इस मामले में एक तरह से भरोसा ही करता है आप पर ! वो इस तरह मिली छुट्टी को उत्सव की तरह लेता है ! देर से सोकर उठता है ! खाता पीता है ,यार दोस्तो के साथ मजे करता है और टीवी स्क्रीन पर कोई पुरानी फिल्म देखते वक्त एकाध बार चैनल बदल कर नेताजी की शवयात्रा के नजारे भी कर लेता है !

नेताओ के हाथो इस्तेमाल होता रहा सरकारी बाबू जाते हुये नेता का इस तरह इस्तेमाल कर खुश हो लेता है !
बात नर्क के दरवाज़ों से शुरू हुई थी ,आप जानना चाहेंगे कि छुट्टी के दिन स्वर्ग के दरवाज़े क्यों नही खुल सकते ,आप लाख खटखटायें वो नही खुलेंगे ,दरअसल स्वर्ग के आरामदेह माहौल से क़ाहिल हो चुके वहाँ के दरवाज़ा खोलने वाले बाबू उस दिन मेरी तरह ही छुट्टी के मूड मे होते है !
अब बता दिया है आपको ,आगे जैसी आपकी इच्छा !

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