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इंदौर पुकारे दिल से”वक्त है बदलाव का” अब कौन | “Time is Changing Now”

Posted on: 17 Apr 2019 21:42 by Mohit Devkar
इंदौर पुकारे दिल से”वक्त है बदलाव का” अब कौन | “Time is Changing Now”

इंदौर। लगभग 39 साल बाद कांग्रेस को कुछ करके दिखाने का अवसर मिला है। विधानसभा चुनाव में सफलता हासिल करने के बाद उत्साहित कांग्रेस अब लोकसभा सीट के नजदीक पहुंच चुकी है। विगत 39 सालों से इंदौर की सीट पर ताई यानी भाजपा का एकतरफा कब्जा है , लेकिन भाजपा ने ही अपनी सीट के साथ छेड़खानी करके कांग्रेस के रास्ते खोल दिये है। इसी कारण भाजपा की यह सीट डगमगाने लगी है। इंदौर में कांग्रेस प्रत्याशी पंकज संघवी को सबसे बड़ा बेनिफिट यह मिला है कि चुनावी मैदान में न तो ताई है और न ही भाई है। अब भाजपा जो भी नया केंडिडेट मैदान में उतरेगी तो उसके सामने पंकज मजबूत दिखेंगे। शहर में पंकज की गिनती एक बड़े नेता के रूप में होती है।

भाजपा की नीतियां भाजपा को ही भारी पड़ी
भाजपा ने चुनावो के लिए जो नीतियां तैयार की है वो उसी पर भारी पड़ रही है। नई नीति अपनाने के चक्कर मे भाजपा विधानसभा चुनाव में अपने बनाए हुए तीन राज्य खो दिए । भाजपा वो ही गलती लोकसभा चुनाव में कर बैठी है। नई नीति के तहत भाजपा ने उम्र का हवाला देकर कई दिग्गजों के टिकिट काट दिए।इसमे एक नाम सुमित्रा महाजन का भी शामिल है जिसने इंदौर के गौरव बढ़ाया ओर पूरे देश मे इंदौर की पहचान दिलाई। भाजपा ने अपनी सीट को संकट में डाल दिया।
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ताई की सीट को अब कौन बचाएगा

विदिशा और इंदौर बीजेपी के गढ़ हैं, जहां से बीजेपी 1989 से लगातार लोकसभा चुनाव जीतती आ रही है। दोनों ही क्षेत्रों के वर्तमान सांसद सुषमा स्वराज और सुमित्रा महाजन ने चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया है। अब भाजपा के सामने सबसे बड़ा संकट यह है कि वो इंदौर सीट को कैसे बचाए। भाजपा के सामने यह एक बड़ी चुनोती है।
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पंकज का दूसरा लोकसभा चुनाव, पहले से ज्यादा सरल है ये चुनाव

इंदौर में सुमित्रा महाजन के बाद कैलाश विजयवर्गीय को मजबूत नेता माना जाता है। इस बार पंकज के सामने ये दोनों ही नेता नही है। पंकज के लिए चुनाव जीतने का सुनहरी अवसर है। पंकज की चुनावी यात्रा कुछ इस तरह से शुरू हुई। 1983 में पहली बार पार्षद का चुनाव जीते। इसके बाद 1998 में पार्टी ने उन्हें पहली बार लोकसभा चुनाव का टिकट दिया। इस चुनाव में संघवी , सुमित्रा महाजन से 49 हजार 852 वोट से चुनाव हारे। सुमित्रा को 440047 वोट तो पंकज को 390195 वोट मिले थे। इसी प्रकार दिसंबर 2009 में वे महापौर का चुनाव लड़े और भाजपा के कृष्णमुरारी मोघे से करीब 4 हजार वोट से हारे। इसके बाद 2013 में विधानसभा चुनाव में उतरे। वे इंदौर विधानसभा पांच नंबर सीट से करीब 12 हजार 500 वोट से विधानसभा चुनाव हारे।
2019 में एक बार फिर पार्टी ने उन पर विश्वास किया और लोकसभा का टिकिट दे दिया। उनके लिए यह चुनाव उतना चुनोती या कठिन नहीं है जितना पहला चुनाव था।
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* “इंदौर सीट के बदलते समीकरण

– इस बार शहर के दो ताकतवर नेता ताई ओर भाई दोनों नही चुनावी मैदान में नही है।
– पहली बार भाजपा से पहले कांग्रेस ने प्रत्याशी घोषित किया है। जबकि भाजपा ने अपना प्रत्याशी तय ही नही किया है।
– इंदौर की सीट हथियाने के लिए कांग्रेस को 39 साल बाद सरल मौका मोल है।
– पंकज संघवी विजय 36 साल से सक्तिय राजनीति में है। वर्तमान परिस्थित को देखते हुए भाजपा को अब पंकज मजबूत प्रत्याशी नजर आ रहा है।
– कांग्रेस प्रत्याशी के लिए अब 4 विधायक मौजूद रहेंगे।
– 39 साल पहले पूर्व CM प्रकाशचंद्र सेठी इंदौर के आखरी सांसद चुने गए थे। सुमित्रा महाजन के आने के बाद भाजपा ने कांग्रेस से यह सीट छीन ली। इसके बाद कांग्रेस का कोई प्रत्याशी ताई के सामने नही टिका। अब स्थिति बदल गई है।

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