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सड़क पे फेंक दी तो ज़िंदगी निहाल हुई, प्रसिद्ध शायर दुष्यंत कुमार की गजल | Throwing it on the road, life Got it

Posted on: 28 Mar 2019 12:16 by Surbhi Bhawsar
सड़क पे फेंक दी तो ज़िंदगी निहाल हुई, प्रसिद्ध शायर दुष्यंत कुमार की गजल | Throwing it on the road, life Got it

बहुत सँभाल के रक्खी तो पाएमाल हुई
सड़क पे फेंक दी तो ज़िंदगी निहाल हुई

बड़ा लगाव है इस मोड़ को निगाहों से
कि सबसे पहले यहीं रौशनी हलाल हुई

कोई निजात की सूरत नहीं रही, न सही
मगर निजात की कोशिश तो एक मिसाल हुई

मेरे ज़ेह्न पे ज़माने का वो दबाब पड़ा
जो एक स्लेट थी वो ज़िंदगी सवाल हुई

समुद्र और उठा, और उठा, और उठा
किसी के वास्ते ये चाँदनी वबाल हुई

उन्हें पता भी नहीं है कि उनके पाँवों से
वो ख़ूँ बहा है कि ये गर्द भी गुलाल हुई

मेरी ज़ुबान से निकली तो सिर्फ़ नज़्म बनी
तुम्हारे हाथ में आई तो एक मशाल हुई

दुष्यंत कुमार

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