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स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी महाराज के ये कल्याणकारी काम हमेशा रहेंगे याद

Posted on: 25 Jun 2019 14:04 by Surbhi Bhawsar
स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी महाराज के ये कल्याणकारी काम हमेशा रहेंगे याद

इंदौर: भारत मां के परम आराधक, निवृत्त-जगद्गुरू शंकराचार्य, पद्मभूषण पूज्य गुरुदेव स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी महाराज मंगलवार को ब्रह्मलीन हो गए। राष्ट्र संत महामंडलेश्वर परम पूज्य स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी जी महाराज, संस्थापक भारत माता मंदिर हरिद्वार की प्रेरणा से तथा उपेक्षित वर्ग को देश की मुख्यधारा से जोड़ने एवं नैतिक मूल्यों की पुनर्स्थापना के उद्देश्य से इंदौर नगर में समन्वय मानव सेवा ट्रस्ट की स्थापना नवंबर 1998 में की गई। ट्रस्ट द्वारा स्थापित उद्देश्यों की पूर्ति हेतु समिति संसाधनों में किए गए प्रयासों का विवरण प्रस्तुत है।

प्राकृतिक आपदा में सहायता

उड़ीसा में आए विनाशकारी तूफान की इस सदी की हृदय विदारक त्रासदी लाखों परिवारों के जनजीवन को बेस्लाबूद कर गई। इस हेतु समन्वय मानव सेवा ट्रस्ट के सदस्यों द्वारा एकत्रित 400 कंबल एवं 30 हजार रुपये मूल्य की दवाइयां राहत कार्य में भेजी गई।

गुजरात भूकंप की त्रासदी में लाखों भाई-बहन गृहविहीन हो गए। हजारों के पारिवारिक स्वजन कालकवलित हो गए।सारा विश्व सहायतार्थ आगे आया। समन्वय मानव सेवा ट्रस्ट इंदौर की ओर से 30 अक्टूबर 2000 को एक ट्रक राहत सामग्री जिसमें टेंट, 200 पलंग, गादियां, रजाइया, दवाइयां एवं खाद्य सामग्री समेत भूकंप ग्रस्त भुज भेजी गई। समन्वय मानव सेवा ट्रस्ट इंदौर द्वारा भूकंप ग्रस्त गुजरात हेतु प्रधानमंत्री सहायता कोष में 51 हजार रुपये का ड्राफ्ट क्रमांक 53350 5 अप्रैल 2001 को परम पूज्य स्वामी जी महाराज के माध्यम से भेजा गया।

भयानक सूखे के कारण आदिवासियों हेतु वनवासी सेवा की स्थापना की गई, जिसके माध्यम से धार जिले में निशुल्क वितरित किया गया। स्वामी जी महाराज धार जिले के ब्लाक के अंतर्गत घोड़ाबाव गांव में सुदूर वनवासियों से रूबरू हुए। समन्वय मानव सेवा ट्रस्ट इंदौर द्वारा 400 कंबल, 20 क्विंटल अनाज एवं दो हजार वनवासियों को भोजन महाराज जी के कर कमलों द्वारा वितरित किया गया।

‘सत्यमित्र सागर’ तालाब निर्माण

पिछले साल अल्प वर्षा के कारण इंदौर जिले के मालवा के पठारों के बीच बसे भील भाई-बहनों को सूखे का सामना करना पड़ रहा था। खाने के लिए अनाज एवं पीने के पानी की समस्या जगह-जगह पर व्यस्त थी। समन्वय परिवार के प्रेरणा स्त्रोत परम पूज्य स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी जी महाराज ने पिछले इंदौर प्रवास के दौरान जिले के गरीब आदिवासी ।भाइयों पर गहराई इस संकट से उबारने के लिए संवेदना प्रकट की थी उनकी उपरोक्त भावना के अनुरूप समन्वय मानव सेवा ट्रस्ट इंदौर ने आदिवासी क्षेत्र नांदेड़ ग्राम में एक तालाब निर्माण की योजना बनाई।

तालाब निर्माण को मूर्त रूप देने का काम 7 अप्रैल 2001 को क्षेत्रीय विधायक अंतर सिंह दरबार, प्रसिद्ध समाजसेवी बाबूलाल बाहेती, राजेंद्र माहेश्वरी एवं समन्वय मानव सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष कमलेश सोजतिया तथा सैकड़ों वनवासी कार्यकर्ताओं की उपस्थिति में हुआ। तालाब निर्माण में आदिवासियों को काम के बदले अनाज के मूल सिद्धांत पर मात्र 7 दिनों में तालाब निर्माण पूरा हुआ।

तालाब की लंबाई 120 मीटर चौड़ाई 30 मीटर एवं ऊंचाई 7 मीटर है। तालाब निर्माण का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि 100 आदिवासी भाइयों ने काम के बदले अनाज द्वारा निर्माण कार्य पूरा किया। इस योजना में 6 हजार मानव दिवस का रोजगार सृजित हुआ। तालाब निर्माण पर कुल लागत चार लाख रुपये आई। जल संसाधन विभाग के नर्मदा ताप्ती कथा के मुख्य अभियंता अशोक कुमार सोजतिया के निर्देशन पर कुशल इंजीनियरों द्वारा निर्माण संबंधी तकनीकी मार्गदर्शन दिया गया।

चिकित्सा सहायता

निशुल्क तपेदिक निवारण शिविर का आयोजन 18 जुलाई 1999 को आदिवासी क्षेत्र बाग जिला धार में आयोजित किया गया। जिसमें 2 हजार आदिवासियों की सघन जांच जैसे एक्सरे, खून की जांच कर के करीब 200 मरीजों को लक्षण पाए जाने पर मुफ्त दवाइयां वितरित की गई। गंभीर बीमारी से ग्रस्त चैनसिंह उम्र 14 वर्ष को 10,500 रुपये की आर्थिक मदद सहायता संस्था के माध्यम से की गई। सहायता संस्था के सहयोग से प्लास्टिक सर्जरी, विकलांग सेवा, पोलियो ग्रस्त बच्चों को कृत्रिम अंग वितरित किए गए।

राष्ट्र रक्षा हेतु सहायता

कारगिल युद्ध में शहीद जवानों के सहायतार्थ इंदौर जिलाधीश महोदय को 11 हजार रुपये का ड्राफ्ट 28 जून 1999 को भेंट किया गया।

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