इस बार देवशयनी एकादशी पर बन रहा हैं ऐसा संयोग, मां लक्ष्मी की रहेगी भक्तों पर कृपा

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vishnu

देवशयनी एकादशी का महत्व हिन्दू शास्त्रों के अनुसार बहुत ही ज्यादा हैं लेकिन आज देवशयनी एकादशी पर कुछ ऐसे संयोग बन रहे हैं जो कि इस एकादशी के महत्व को और भी ज्यादा बढ़ा रहा हैं। आइए जानते हैं कि आखिर इस एकादशी पर ऐसा क्या संयोग बन रहा हैं जो इसे और भी ज्यादा खास बना रहा हैं।

इस साल देवशयनी एकादशी पर सबसे बड़ा संयोग यह हैं कि आज शुक्रवार हैं जो कि धन की देवी मां लक्ष्मी का दिन माना जाता हैं। इसके साथ ही इस वर्ष देवउठनी एकादशी भी शुक्रवार को आ रही हैं। बता दें कि इस वर्ष देवउठनी एकादशी 8 नवंबर को हैं। इस दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागेंगे। यह संयोग इस वर्ष की दोनों एकादशी के समय को विष्णु की पूजा-अर्चना करने का सबसे उत्तम समय बना रहा हैं। इसलिए देवशयनी से लेकर देवउठनी एकादशी तक शुक्रवार को लक्ष्मी नारायण की पूजा श्रद्धालुओं के लिए सुख-समृद्धिदायक रहेगी।

शास्त्रों में बताया गया हैं कि भगवान विष्णु ने वामन रूप में दैत्य बलि के यज्ञ में तीन पग दान के रूप में मांगे थे। जिसमें उन्होंने पहले पैर में संपूर्ण पृथ्वी, आकाश और सभी दिशाओं को ढक लिया। दूसरे कदम में सम्पूर्ण स्वर्ग लोक ले लिया जिसके बाद तीसरे पैर के लिए बलि ने अपना सिर आगे कर दिया था। बलि के इस प्रकार के दान को देख कर भगवान विष्णु उससे काफी प्रसन्न हो गए और उससे वरदान मांगने को कहा।

बलि ने वरदान मांगते हुए कहा कि प्रभु आप हमेशा मेरे महल में रहें। तब इसी दिन से भगवान विष्णु जी द्वारा वरदान का पालन करते हुए तीनों देवता 4-4 माह के लिए पाताल में निवास करते हैं। विष्णु देवशयनी एकादशी से देवउठानी एकादशी तक और शिवजी महाशिवरात्रि तक और ब्रह्मा जी शिवरात्रि से देवशयनी एकादशी तक पाताल में निवास करते हैं।

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