मेरी डायरी के पन्नो से….राजनीति में ऐसा भी होता है !!

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“जब लोकसभा अध्यक्ष  सुमित्राताई के सांसद रहते उनके निवासपर संपत्ति कर की वसूली करने के लिये पूरे फौजफाटे के साथ पहूंच गये थे निगम के लापरवाह अधिकारी!!

घटना 15-16 साल(वर्ष -2004) पुरानी है। मैं अपने बचपन के मोहल्ले नंदलालपूरा जाने के लिये सब्जीमंडी से,सांसद सुमित्राताई के निवास के सामने से गुजर रहा था। तभी मैंने देखा कि निगम के कुछ वाहन ताई के मकान के सामने खड़े है।और काफी भीड़ जमा है। तब मैं भी उत्सुकतावश वहां पूरे समय, कहानी खत्म होने तक डटा रहा था।

तब कैलाश विजयवर्गीय इंदौर के महापौर तथा प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री थे। उस समय संपत्ति कर की रिकार्डतोड़ वसूली करने के लिये बेहद सक्रिय हुए निगम के राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने एक कमाल कर दिया था। ये अधिकारी अपने अधीनस्थ अनेक कर्मचारियों को लेकर सुमित्राताई के शहर के राजवाड़ा के नजदीक मध्यक्षेत्र नंदलालपूरा में स्थित मकान पर कर वसूली करने हेतु संपत्ति जप्त करने की कार्रवाई करने पहुँच गये थे।

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उक्त लापरवाहीयुक्त कार्यवाही से ताई आगबबूला हो गयी थी।उनका नाराज होना स्वाभाविक भी था। क्योंकि ताई की ओर से बाकायदा नियमिततौर पर संपत्ति कर जमा किया जाता रहा। उनके पति जानेमाने एडवोकेट स्व .जयंत महाजन के आकस्मिक निधन के बाद संपत्ति के नामांतरण संम्बंधी कार्यवाही जारी थी और सिर्फ विगत वर्ष का टॅक्स जमा करना ही शेष था। वित्तीय वर्ष 31 मार्च 2005 होने से निगम की ओर से दो साल का बकाया निकालना तथा जप्ती की कार्यवाही तक ले जाना सर्वथा अनुचित और अपमानजनक बात थी।

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ताई उक्त कार्यवाही से बेहद संतप्त हो गई।समय नही गवाते वे थेट नगर निगम कार्यालय में पहुँच गयी थी। वहां उन्होंने तत्कालीन निगमायुक्त आकाश त्रिपाठी से मुलाकात की और उनके समक्ष संबधित अधिकारियों की लू उतार दी थी।अधिकारीगण तत-फ़फ़ करने लगे थे। उन्होंने अधिकारियों को जोरदार फटकार लगाते हुए कहा था कि मेरी जैसो के साथ इस तरह की कार्रवाई की गई है, तो सामान्य नागरिको के साथ एस्प क्या करते होंगे ?? बाद में उक्त बेहद अपमानजनक कार्यवाही के लिए तत्कालीन कार्यकारी महापौर स्व.मधु वर्मा ने निगम मि ओर से लिखित क्षमायाचना की थी।इस तरह मामला खत्म हुवा था।

“अनिल कुमार धड़वईवाले”

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