कालसर्प दोष से ऐसे मिल जाएगी मुक्ति, इन लोगों पर ज्यादा प्रभावी होता है यह दोष

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जब किसी व्यक्ति का बूरा समय शुरु होता हैं तो माना जाता है कि उस पर किसी ग्रह या दोष के कारण समस्या आ रही है। कालसर्प दोष इन्हीं में से एक दोष होता है। कालसर्प योग के कारण सूर्यादि सप्तग्रहों की शुभफल देने की क्षमता समाप्त हो जाती है। इससे जातक को 42 साल की आयु तक परेशानियां झेलनी पड़ती है। इस दोष से कुछ भाग्यशाली लोगों के जीवन में अच्छा प्रभाव भी देखने को मिल जाता हैं।

1- यदि किसी कुंडली में राहू और केतु के बीच अन्य ग्रहों की उपस्थिति हो तब कालसर्प योग का असर होता है। वहीं जब केतु और राहु के बीच ग्रहों की उपस्थिति हो तब इस योग का असर नहीं होता है।
2- लग्न या चन्द्रमा राहु अथवा केतु के नक्षत्र में यानि आर्द्रा, स्वाती, शतभिषा, अश्विनी, मघा , मूल में हो तो तब यह अधिक प्रभावी होता है।

3- राहु की शनि, मंगल अथवा चन्द्रमा के साथ युति हो तो भी यह योग अधिक प्रभावी होता है।

4- कुंडली में अनन्त, तक्षक एवं कर्कोटक संज्ञक कालसर्प योग में क्रमश लग्नेश, पंचमेश, सप्तमेश एवं लग्नेश की युति राहु के साथ हो तो यह योग अधिक प्रभावी होता है।

5- कालसर्प योग के साथ-साथ शकट,केमदूम एवं ग्रहों की नीच अस्तंगत, वक्री स्थिति हो तो कालसर्प योग अधिक प्रभावी होता है।

6- जन्म लेने और फिर उसके बाद करियर के निर्माण के समय यदि राहु की अथवा इससे युति ग्रह की अथवा राहु के नक्षत्र में स्थित ग्रह की दशा हो तो कालसर्प योग का असर अधिक होता है।

  • उपाय
    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कालसर्प दोष होने पर कुछ उपाय हैं जैसे अगर किसी की कुंडली में कालसर्प है उसे हर रोज भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। इसके अलावा चांदी की नाग की आकृति की अंगूठी पहनना चाहिए।

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