साल में एक बार ही आती है ये पूर्णिमा, चांदनी रात में बरसता है अमृत

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शरद पूर्णिमा की रात को कई महत्व दिए गए है, धार्मिक मायनों के अनुसार इस यह रात सबसे ज्यादा लाभ देने वाली होती है। इस दिन मंदिरो में कई विशेष आयोजन किए जाते है। मान्यताओं के अनुसार इस रात को आसमान से अमृत की वर्षा होती है। शरद पूर्णिमा की रात को बेहद ही खूबसूरत रात कहा जाता है। मान्यता के अनुसार देवता खुद धरती पर इस रात को देखने के लिए आते है। इस साल शरद पूर्णिमा का पर्व 13 अक्टूबर रविवार को आ रहा है। आइए जानते है इस दिन का महत्व।

यह पूर्णिमा आम पूर्णिमा नहीं होती है माना जाता है यह साल में एक बार ही आती है, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूरे साल में केवल इस दिन चंद्रमा 16 कला उसे निपुण होता है इससे निकलने वाली किरणें रात में अमृत बरसाती है। इस दिन कुछ लोग व्रत भी रखते हैं।

पूजा विधि

शरद पूर्णिमा के दिन सुबह जल्दी उठ कर शुद्ध होने के बाद ही व्रत प्रारंभ हो जाता है। माताएं अपनी संतान की मंगल कामना के लिए इस दिन देवी-देवताओं का पूजन करती हैं। शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा पृथ्वी के बेहद करीब आ जाता है और इस ऋतु में मौसम साफ रहता है। शरद पूर्णिमा की रात्रि में चंद्र किरणों का शरीर पर पड़ना बहुत ही शुभ माना जाता है। धार्मिक ही नहीं वैज्ञानिक मायना मे भी इस रात का बहुत महत्व है।

1- इस दिन सुबह शुद्ध होकर व्रत का संकल्प लें और मान्यता अनुसार इस दिन पवित्र नदी, जलाश्य या कुंड में स्नान करना चाहिए। ऐसा करने से व्रत का लाभ अधिक मिलता है।

2- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन गाय के दूध से बनी खीर में चीनी मिलाकर आधी रात के समय भगवान को भोग लगाएं। रात्रि में जब चंद्रमा आकाश के मध्य में स्थित हो तब चंद्र देव का विधि विधान से पूजन करें और खीर का नेवैद्य अर्पण करें।

3- भगवान को भोग लगाने के बाद रात को खीर से भरा बर्तन चांदनी रात में बाहर रख दें और दूसरे दिन उसे ग्रहण करें।

4- पुण्य प्राप्त करने के लिए इस दिन पूर्णिमा व्रत कथा सुननी चाहिए। कथा से पूर्व एक लोटे में जल और गिलास में गेहूं, पत्ते के दोने में रोली व चावल रखकर कलश की वंदना करें और दक्षिणा चढ़ाएं।

5- शरद पूर्णिमा के दिन भगवान शिव-पार्वती और कार्तिकेय की भी पूजा का विधान हैं।

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