ये रहे विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के माननीय सांसद..?

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झारखण्ड से चुने गए लोकसभा सदस्य स्वनामधन्य निशिकांत दुबे के पैर धोकर एक वोटर द्वारा वही पानी पीने की झकझोरने वाली घटना मीडिया में कम,सोशल मीडिया में ज्यादा चर्चित हो रही है. इस कृत्य को भारतीय परम्परा और संस्कृति से जोड़कर सांसदजी बेशर्मी से बचाव करने में लगे हैं.

शर्मिंदा होने की बजाए वे इसे सही ठहराने के लिए महाभारत काल का हवाला दे रहे हैं.यह बात ज्यादा मायने नहीं रखती की वे भाजपा से हैं बल्कि अफ़सोस यह की वे कानून बनाने वाली उस संस्था का हिस्सा हैं जिसकी संप्रभुता, सर्वोच्चता और पवित्रता की खूब दुहाई दी जाती है.यह बात अलग है की आपराधिक गतिविधियों में लिप्त कुख्यात चेहरे भी इसका हिस्सा बनते रहे हैं और बनते रहेंगे..! उनका यह कह कर बचाव किया जाता है की अदालत ने उन्हें अभी अपराधी घोषित नहीं किया है. जिस मुल्क की छोटी-बड़ी अदालतों में करोड़ों-करोड़ों मुकदमें सुनवाई को तरस रहे हों वहां इस तर्क का मतलब समझाने की जरूरत है क्या..?

एक समय था जब जुझारू समाजवादी जार्ज फर्नांडिस ने अपनी पार्टी के मुखपत्र प्रतिपक्ष में संसद को दलालों का अड्डा घोषित किया था.तब संसद में खूब हंगामा हुआ और उन्हें सदन में बुलाकर सजा देने की मांग भी की गई क्योंकि वे सांसद नहीं थे.यह बात और है की दोनो में से कोई सदन इसका साहस नहीं जुटा पाया था..!झारखण्ड की घटना की खबर नंबर-एक का दावा करने वाले दैनिक भास्कर में दिखाई नहीं दी….शायद इसे निगेटिव न्यूज़ मान कर ख़ारिज कर दिया गया होगा..!

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