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ये हैं हिन्दुस्तान के 5 सबसे बड़े गद्दार, लिस्ट में एक ऐसा नाम है जो जानकर आप भी दंग रह जाएंगे

Posted on: 29 Jun 2018 16:49 by krishnpal rathore
ये हैं हिन्दुस्तान के 5 सबसे बड़े गद्दार, लिस्ट में एक ऐसा नाम है जो जानकर आप भी दंग रह जाएंगे

नई दिल्ली – सोने की चिड़िया कहे जाने वाले हिन्दुस्तान पर कई आक्रमण हुए हैं। इतिहासकारों के मुताबिक, हिन्दुस्तान पर सबसे पहला आक्रमण सिकंदर प्रथम ने किये थां। लेकिन, कुछ इतिहासकारों का मानना है कि हिन्दुस्तान पर सबसे पहले विदेशी आक्रमण आर्यो ने किया था। खैर जो भी हो इस बात से कोई इंकार नहीं कर सकता कि हिन्दुस्तान को सबसे ज्यादा नुकसान बाहरी आक्रमणकारियों से ज्यादा देश में छिपे गद्दारों से हुआ। भारतीय इतिहास के गद्दार अगर उस वक्त गद्दारी न करते तो देश आज शायद अमेरिका जितना ही अमीर और संपन्न होता। आज हम आपको भारतीय इतिहास के गद्दार से मिलवाने जा रहे हैं जो न होते तो शायद देश आज भी सोने की चिड़िया होता।

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ब्रिटिश शासन के दौरान प्लासी की कुख्यात लड़ाई में मीर जाफर ने अपने ही राजा सिराजुद्दौला को धोखा देकर अंग्रेजों की मदद की जिसकी वजह से भारत में अंग्रेजों को पांव पसारने का मौका मिल गया। प्लासी के युद्ध के बाद ही भारत में ब्रिटिश राज की स्थापना की शुरुआत हुई थी। जाफर अवसरवादी और महत्वाकांक्षी था। हालांकि, अंग्रेजो ने हिन्दुस्तान के इस गद्दार को उसकी गद्दारी की सजा भी एक गद्दार से ही दिलवाई। अंग्रेजों ने मीर कासिम का सहारा लेकर मीर जाफर को मार डाला।

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लगभग हम सभी पृथ्वीराज चौहान और कन्नौज के राजा राजा जयचंद की कहानी से परिचित हैं। पृथ्वीराज के कवि चंद बरदाई ने अपने ‘पृथ्वीराज रासो’ (राजा के जीवन पर आधारित एक कविता) में दावा किया है कि दोनों राज्यों के बीच कई गद्दार थे, जिससे अफगान शासक गज़नी के खिलाफ तराई की दूसरी लड़ाई में हार सुनिश्चित हो गई थी। पृथ्वीराज चौहान और राजा जयचंद की दुश्मनी बहुत पुरानी थी। जयचंद ने मोहम्मद गौरी के साथ मिलकर पृथ्वीराज से गद्दारी की थी। जयचंद ने दिल्ली की सत्ता हासिल करने के लिए मोहम्मद गौरी का साथ दिया और साथ मिलकर पृथ्वीराज को हरा दिया। जिसके बाद भारत पर इस्लामिक आक्रमणकारियों के आक्रमण बढ़ गए।जयाजीराव सिंधिया: के लिए इमेज परिणाम

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भारतीय इतिहास के गद्दार का जब भी नाम लिया जायेगा उसमें जयाजीराव सिंधिया का नाम जरुर होगा। वो एक भारतीय इतिहास के गद्दार थे जिसने अपनी वीरता और बहादुरी के लिए जानी जाने वाली रानी लक्ष्मी बाई से गद्दारी की थी। जयाजीराव सिंधिया ग्वालियर के महाराज थे। जयाजीराव सिंधिया देश द्रोही राजाओं में से एक था और अंग्रेजों का समर्थक था। जयाजीराव सिंधिया ने अंग्रेजों के साथ मिलकर एक कूटनीति तैयार की। जयाजी राव ने रानी की उनकी ही सेना के खिलाफ भड़काया और जब अंगेजी सैनिकों के साथ रानी से लड़ने आई, तब ग्वालियर की बागी सेना ने रानी को अकेला छोड़ दिया।

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गद्दारी के मामले में मानसिंह जयचंद से बिल्कुल भी कम नहीं था। महाराणा प्रताप देश को आज़ाद कराने के लिए जंगलों में घास की रोटियां खाते थे तो मानसिंह मुगलों के साथ मिलकर देश के साथ गद्दारी करता था। राजा मानसिंह मुगलों के सेना प्रमुख था। मान सिंह महाराणा प्रताप और मुगलों के प्रसिद्ध हल्दी घाटी के युद्ध में मुगल सेना का सेनापति था। इस युद्ध में महाराणा ने मान सिंह को मार कर उसे उसकी गद्दारी की सजा उसी वक्त दे दी थी।

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भारतीय इतिहास के गद्दार में फणीन्द्र नाथ घोष का नाम शायद सबसे ऊपर होना चाहिए। क्योंकि उसने सैण्डर्स-वध और असेम्बली में बम फेकने के केस में भगत सिंह के खिलाफ गवाही दी थी। वो फणीन्द्र नाथ घोष ही था जिसकी गवाही की वजह से भगत सिंह, राजगुरू एवं सुखदेव को फांसी की सज़ा सुनाई गई थी। फणीन्द्र नाथ घोष को अंग्रेजों ने सरकारी गवाह बनाया था। फणीन्द्र नाथ घोष ने ही पंडित आज़ाद के शव की शिनाख्त भी की थी।

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