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इन धुरंधरों ने तैयार किया मोदी सरकार 2.0 का पहला बजट, ये है बड़ी चुनौती

Posted on: 04 Jul 2019 14:06 by Surbhi Bhawsar
इन धुरंधरों ने तैयार किया मोदी सरकार 2.0 का पहला बजट, ये है बड़ी चुनौती

नई दिल्ली: नई सरकार यानी मोदी सरकार 2.0 शुक्रवार को अपना पहला बजट पेश करने जा रही है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण नई सरकार का पहला बजट पेश करेंगी। बजट की अंतरिम तैयारियां पूरी हो चुकी है। कयास लगाए जा रहे है कि इस बजट में सरकार कुछ ऐसे कदम उठाएगी जिससे अर्थव्यवस्था में सुधार हो।

बजट से पहले आए आर्थिक सर्वे में जीडीपी 7 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया है। इस बार का बजट बहुत ,अहत्व्पूर्ण है क्योकि वित्त मंत्री के सामने अर्थव्यवस्था को लेकर कई चुनौतिया हैं। अर्थव्यवस्था में सुस्ती जैसे हालात हैं, जो अगर ठीक से नहीं संभाले गए तो मंदी में बदल सकते हैं।

मोदी सरकारका पहला बजट वित्त मंत्रालय की टीम ने मिलकर तैयार किया है। बजट तैयार करने वाली वित्त मंत्री की इस टीम में एक से एक धुरंधर शामिल है। इन दिग्गजों की सलाह निश्चित रूप से वित्त मंत्री के लिए बहुत काम की रही होगी।

के. सुब्रमण्यन

सुब्रमण्यन ने फाइनेंशियल इकोनॉमिक्स से पीएचडी किया है। उन्हें अमेरिका के शिकागो यूनिवर्सिटी से प्रोफेसर लुइगी जिंगालेस और रघुराम राजन ने पढ़ाया है। ऐसे में अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में उनकी सलाह सीतारमण को जरुरु काम आई होगी।

सुभाष गर्ग

सुभाष गर्ग वित्त मंत्रालय के सबसे पुराने खिलाड़ी है। ग्रोथ रेट कम होने, उपभोग घटने, निजी निवेश घटने के हालात में उपाय किस तरह से किया जाएं कि राजकोषीय मजबूती भी बनी रहे, इसमें गर्ग की सलाह काम आ सकती है।

जीसी मुर्मू

गुजरात काडर के आईएएस अधिकारी मुर्मू इसके पहले वित्तीय सेवाएं और राजस्व विभाग में काम कर चुके हैं। उनके सामने चुनौती यह थी कि प्रधानमंत्री की पसंदीदा योजनाओं को भी पूरी तरह आगे बढ़ाया जाए और खर्चों पर भी अंकुश रहे।

राजीव कुमार

राजीव कुमार ने मोदी सरकार के कई प्रमुख एजेंडा जैसे सार्वजनिक बैंकों के विलय, फंसे कर्जों पर अंकुश जैसे कई कामों में अहम् भूमिका निभाई है। अभी उनके खाते में बीमा कंपनियों के विलय और सार्वजनिक बैंकों में सुधार की भी जिम्मेदारी है।

अतानु चक्रवर्ती

अतानु चक्रवर्ती 1985 बैच के गुजरात काडर के आईएएस है, जिन्होंने पिछले साल सरकार के विनिवेश लक्ष्य को पूरा करने में काफी मदद की थी। अभी भी उनके सामने सार्वजनिक कंपनियों की हिस्सेदारी बेचने का महत्वपूर्ण एजेंडा है।

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