उन लोगों पर हमेशा बनी रहती है शनिदेव की कृपा जो करते है शनिवार का यह उपाय

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shani

आपको पता ही होगा शनिदेव एकमात्र ऐसे देवता हैं जिनके क्रोध से इंसान तो क्या देवता भी कांपते हैं। शनि को यम, काल, दु:ख, दारिद्र और मंद कहा जाता है। बता दे, शनि देव, भगवान सूर्य तथा छाया (संवर्णा) के पुत्र हैं। सूर्य के अन्य पुत्रों की अपेक्षा शनि शुरू से ही विपरीत स्वभाव के थे। इनकी द्रष्टि में जो क्रूरता है, वह इनकी पत्नी के शाप के कारण है। ब्रह्म पुराण में इस शाप की कथा बताई गई है।

शनिवार को शनि की पूजा करने का विधान हैं। शनि देव को न्‍याय का देवता माना जाता है। बहुत से लोग उनसे डरते हैं मगर वह ऐसे देवता हैं जो सभी के कर्मों का फल देते हैं। शनि ग्रह भगवान शनिदेव को दर्शाता है और भारतीय ज्योतिष में नवग्रह के नाम से जाने वाले सभी स्वर्गीय देवताओं में से एक है।

ऐसे करें शनिदेव की पूजा –

शुद्ध स्नान करके पुरुष पूजा कर सकते हैं। महिला शनि चबूतरे पर नहीं जाएं। मंदिर हो तो स्पर्श न करें। अगर आपकी राशि में शनि आ रहा है तो शनि को अवश्य पूजें। अगर आप साढ़ेसाती से ग्रस्त हो तो शनिदेव का पूजन करें। यदि आपकी राशि का अढैया चल रहा हो तो भी शनि देव की आराधना करें।

यदि आप शनि दृष्टि से त्रस्त एवं पीड़ित हो तो शनिदेव की अर्चना करें। यदि आप कारखाना, लोहे से संबद्ध उद्योग, ट्रेवल, ट्रक, ट्रांसपोर्ट, तेल, पे‍ट्रोलियम, मेडिकल, प्रेस, कोर्ट-कचहरी से संबंधित हो तो आपको शनिदेव मनाना चाहिए। यदि आप कोई भी अच्‍छा कार्य करते हो तो शनि देव की कृपा के लिए प्रार्थना करें।

यदि आपका पेशा वाणिज्य, कारोबार है और उसमें क्षति, घाटा, परेशानियां आ रही हों तो शनि की पूजा करें। शनिदेव को तेल के साथ ही तिल, काली उदड़ या कोई काली वस्तु भी भेंट करें। सिर से टोपी आदि निकालकर ही दर्शन करें।

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