शहीदों की चिंताओं पर अब हर बरस मेले नहीं लगते | There are no festivals on the concerns of the martyrs every year

0
45
martyrs

प्रसिद्ध पत्रकार राजेश बादल की कलम से

इलाहाबाद आता हूँ तो अमर शहीद चन्द्र शेखर आज़ाद के बलिदान स्थल पर एक बार जरूर जाता हूँ । अपने भीतर उन्हें धड़कते हुए महसूस करता हूँ ।शनिवार को बड़ी तकलीफ हुई । मैंने वहाँ पार्क का रखरखाव करने वालों से पूछा कि बीते दिनों कुंभ था । लाखों लोग आए होंगे । आज़ाद के इस बलिदान स्थल पर मत्था टेकने भी अनगिनत लोग आए होंगे । उत्तर सुनकर शर्म से सिर झुक गया । वे बोले , जो भी कुंभ में संगम नहाने आए ,उनमें से एक फ़ीसदी भी इस तीर्थ पर नहीं आए।

must read: आखिर क्या है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बनी फिल्म में | After all what is in the film made on Prime Minister Narendra Modi

इस पर मैं किसे धिक्कारूं ? यह कैसा देश हम बनाते जा रहे हैं? जिन शहीदों के कारण हम आज़ादी की खुली हवा में सांस ले पा रहे हैं ,उन्हें याद भी नहीं करना चाहते और प्रदूषित गंगा में लोटने के लिए हमारी जेबें भरी रहतीं हैं । लानत है हम पर ।इन दिनों चुनाव की रैलियों में ढेर सारे बड़े छोटे नेता यहाँ आ रहे हैं । कमबख़्त किसी लीडर को शहीद स्मारक पर आने का वक़्त नही है।

यहाँ चित्रों में से एक उस रिवॉल्वर का है,जिससे आज़ाद ने अपनी देह को अंग्रेजों से मुक्त किया और एक वास्तविक वही चित्र है ,जो आज़ाद की शहादत के ठीक बाद लिया गया ।

must read: लोकप्रिय गीत का अनुपात | Popular song’s ratio

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here