ग्रामीणों ने कहा पहले पुल बनाओ उसके बाद आना वोटों की भीख मांगने | The villagers said, first make the bridge after that begging for votes

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छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव के ग्रामीणों ने तय किया है कि जब तक पुल नहीं बनेगा तब तक वे मतदान करने के लिए नहीं जाएंगे और उनके इस निर्णय ने सभी राजनीतिक पार्टियों को परेशान करके रख दिया है उसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि आचार संहिता लागू होने से फिलहाल पुल का निर्माण तो नहीं हो सकता अब दोनों ही पार्टियों के सामने यह समस्या खड़ी हो गई कि ग्रामीणों को कैसे समझाया जाए

लोकसभा चुनाव के चलते सभी राजनीतिक पार्टियां अपने अपने कार्य का उल्लेख करते हुए जनता के बीच जा रही है। दोनों ही मुख्य पार्टियां अपने अपने कामों को गिनाने में पीछे नहीं हट रही है। वहीं छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव विधानसभा क्षेत्र में जनप्रतिनिधियों की वादाखिलाफी और झूठे आश्वासन को लेकर अम्बागढ़ चौकी ब्लाक की ग्राम पंचायत दोड़के और आश्रित ग्राम सहित 6 गांव के ग्रामीणों ने लोकसभा चुनाव का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है।

इसी के चलते ग्रामीणों ने चुनाव के बहिष्कार का फरमान भी जारी कर दिया है।

ग्रामीणों का कहना है कि दोड़के और विचारपुर के बीच पड़ने वाले शिवनाथ नदी में पूल निर्माण नहीं होने को लेकर वह चुनाव का बहिष्कार कर रहे है। इसके अलावा ग्रामीणों ने बताया कि शासन की अनदेखी, जनप्रतिनिधियों की वादाखिलाफी और झूठे आश्वासन के चलते वो लोग इस तरह का कदम उठाने पर मजबूर हुए है।

शिवनाथ नदी में पूल निर्माण नही होने से ग्रामीणों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि पुल नहीं होने के कारण पुलिस थाने जाने के लिए 40 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। इसके अलावा अन्य काम होने पर ग्रामीणों को इससे भी अधिक लम्बी दुरी तय करना पड़ती है।

बता दे की यदि यहां पुल का निर्माण हो जाता है तो 40 किलोमीटर की दूरी घटकर 8 किलोमीटर की हो जाएगी। इस बात से साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि ग्रामीणों को इस पुल की कितनी जरूरत है।

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