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अब विपक्ष में बैठना पड़ेगा इन दोनों बहनों को

Posted on: 26 Dec 2018 15:32 by Surbhi Bhawsar
अब विपक्ष में बैठना पड़ेगा इन दोनों बहनों को

मध्यप्रदेश और राजस्थान में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा को मिली हार के बाद दोनों बहनों को विपक्ष में बैठना पड़ेगा। पार्टी के सत्ता से बाहर होने के बाद एक बहन को मुख्यमंत्री का पद खोना पड़ा तो दूसरी को मंत्री पद।
बात सिंधिया घराने से ताल्लुक रखने वाली वसुंधरा राजे सिंधिया और यशोधरा राजे सिंधिया की हैं।

वसुंधरा राजे राजस्थान की झालरापाटन सीट से चुनाव मैदान में उतरी थीं और जीत भी गई लेकिन राज्य में भाजपा के सत्ता से बाहर होने के बाद उन्हें विपक्ष में बैठना पड़ रहा है। वही यशोधरा राजे सिंधिया मध्यप्रदेश की शिवपुरी विधानसभा सीट से जीती है लेकिन राज्य में कांग्रेस की सरकार बनने के कारण अब ये भी मंत्री नहीं बन सकती।

वसुंधरा राजे का राजनीतिक करियर

वसुंधरा राजे को अपने पहले चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था। साल 1984 में वह मध्यप्रदेश के भिड़ लोकसभा क्षेत्र से पहली बार चुनाव मैदान में उतरी थीं, जिसमे कांग्रेस के कृष्ण सिंह ने उन्हें हरा दिया था। अटलबिहारी वाजपेयी मंत्रिमंडल में वह विदेश राज्यमंत्री बनीं। साल 2003 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने झालरापाटन सीट से शानदार जीत हासिल की और राजस्थान की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं। साल 2013 के विधानसभा चुनावों से उन्होंने पार्टी को प्रचंड बहुमत से जीत दिलाई और एक बार फिर सीएम की कुर्सी पर विराजमान हो गईं। साल 2018 के विधानसभा चुनाव में वसुंधरा का जादू नहीं चल पाया, वह अपनी सीट बचाने में तो कामयाब हुई लेकिन सत्ता नहीं बचा पाई।

यशोधरा राजे सिंधिया का राजनीतिक करियर

यशोधरा राजे सिंधिया ने पहली बार साल1998 में मध्यप्रदेश की शिवपुरी सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था, जिसके बाद से वह लगातार यहां से विजय होती आ रही हैं। साल 2003 के विधानसभा चुनाव में जीत के बाद वह पर्यटन, खेल और युवा मामलों के लिए राज्यमंत्री बनीं। 15वीं लोकसभा के लिए उन्हें ग्वालियर से सांसद भी निर्वाचित किया गया। साल 2013 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने इसी विधानसभा सीट से कांग्रेस के बिरेंद्र रघुवंशी को हराया था। इसके बाद उन्हें वाणिज्य, उद्योग तथा रोजगार मंत्री और मध्यप्रदेश औद्योगिक केन्द्र विकास निगम (भोपाल) का अध्यक्ष बनाया गया था. अब वह शिवपुरी सीट से विधायक है।

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