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एक महिला के लापता होने की कहानी, वरिष्ठ पत्रकार ऋषि राजोरिया की टिप्पणी

Posted on: 10 May 2018 04:28 by Ravindra Singh Rana
एक महिला के लापता होने की कहानी, वरिष्ठ पत्रकार ऋषि राजोरिया की टिप्पणी

मुंबई में ग्रांट रोड इलाके में रहने वाली कीर्ति व्यास करीब एक माह पहले लापता हो गई। वह सलोन कारोबार चलाने वाली कंपनी ब्लंट की अंधेरी शाखा में फाइनेंस मैनेजर थी। वह रोजाना सुबह ग्रांट रोड स्टेशन से लोकल ट्रेन में अंधेरी पहुंचती थी और शाम को छह सात बजे घर लौटती थी। एक दिन शाम को वह घर नहीं लौटी। परिवार के लोग फोन पर भी उससे संपर्क नहीं कर सके। दफ्तर से जानकारी ली तो पता चला कि वह पहुंची ही नहीं थी।

उन्होंने डीबी रोड पुलिस थाने में इत्तला दी। एक महीने तक पता नहीं चला कि कीर्ति व्यास कहां चली गई। पुलिस अंधेरे में सुराग तलाश रही थी। आखिरकार सीसीटीवी फुटेज से मदद मिली। पुलिस ने कीर्त व्यास के घर के आसपास के तमाम सीसीटीवी फुटेज चेक किए। जिस दिन सुबह वह घर से निकली थी, उस दिन के उपलब्ध फुटेज की गहनता से जांच की गई तो पता चला कि कीर्ति घर से निकल कर एक एसयूवी गाड़ी में सवार हो गई थी। वह गाड़ी कीर्ति के घर से निकलने से करीब पौन घंटा पहले से वहां खड़ी थी। पुलिस ने उस गाड़ी का पता लगाया।

वह गाड़ी सिद्धेश ताम्हणकर की थी, जो ब्लंट कंपनी में कीर्ति का जूनियर था। कीर्ति अपनी कंपनी में सख्त अधिकारी मानी जाती थी और मातहतों का प्रदर्शन ठीक नहीं होने पर उन्हें चेतावनी देती रहती थी। सिद्धेश को भी उसने अपना काम सुधारने के लिए पंद्रह दिन का अल्टीमेटम दे रखा था। पुलिस ने उसे पकड़कर अपने तरीके से पूछताछ की तो उसने सबकुछ उगल दिया। वह कंपनी की एक अन्य शाखा की कर्मचारी खुशी सहजवानी के साथ कार से कीर्ति के घर के सामने पहुंच गया था। कीर्ति घर से निकली तो उसने गाड़ी से दफ्तर चलने का अनुरोध किया, जो कीर्ति ने मान लिया। उन दोनों ने अगले पंद्रह बीस मिनट के भीतर कीर्ति को मार डाला और उसकी लाश सीट के नीचे छिपा दी।

लाश सहित वह कार उनके घर खड़ी रही। अगले दिन तड़के वे उस लाश को वडाला में सुनसान जगह देखकर खाड़ी के किनारे झाडियों में फेंक आए। पुलिस को अब तक कीर्ति की लाश नहीं मिली है, लेकिन उसने हत्या का मामला दर्ज कर लिया है। सिद्धेश की कार में पुलिस को खून के कुछ धब्बे मिले थे। पुलिस ने फोरेंसिक जांच कराई। कीर्ति के परिजनों के खून से मिलान किया तो पुष्टि हुई कि वह खून कीर्ति का ही था। सख्ती से पूछताछ करने पर सिद्धेश ने गुनाह कबूल कर लिया। वह दफ्तर में नोटिस मिलने से कीर्ति से नाराज था। सिद्धेश की उम्र करीब 28 साल है।

खुशी सहजवानी 42 साल की है। खुशी का कीर्ति के साथ कोई वैरभाव नहीं था। फिर भी उसने सिद्धेश के साथ मिलकर कीर्ति की हत्या में सहयोग दिया। क्या कीर्ति को इस बात की सजा मिली कि वह महिला होने के साथ ही दबंग अधिकारी भी थी? क्या सिद्धेश पुरुषवादी अहंकार से पीडित हो गया था? जो भी कारण हो, कीर्ति की मौत दुर्भाग्यपूर्ण है। इस तरह हत्या करने की प्रेरणा उसे इंद्राणी मुखर्जी से मिली जो अपनी बेटी शीना बोरा की हत्या के आरोप में जेल में है।

उसने भी चलती कार में अपनी बेटी को मारकर लाश को कार में छिपाकर घर में रखा और बाद में उसे सूटकेस में रखकर पनवेल के पास जंगल में फेंककर जला दिया था। सिद्धेश ने भी सोचा कि वह कीर्ति की लाश को समुद्र किनारे फेंक देगा, जहां वह बह जाएगी और कोई नहीं जान पाएगा कि वह कहां गई। लेकिन कीर्त के घर के आसपास के सीसीटीवी फुटेज और कार में मौजूद खून के धब्बों से उसकी करतूत का खुलासा हो गया। अब सिद्धेश ताम्हणकर और खुशी सहजवानी जेल के सींखचों के पीछे पहुंच गए हैं।

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