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स्टेट ऑफ द एजुकेशन रिपोर्ट फॉर इंडिया का खुलासा, भारत में एक चैथाई दिव्यांग बच्चों को नहीं हैं अक्षर ज्ञान

Posted on: 05 Jul 2019 17:16 by bharat prajapat
स्टेट ऑफ द एजुकेशन रिपोर्ट फॉर इंडिया का खुलासा, भारत में एक चैथाई दिव्यांग बच्चों को नहीं हैं अक्षर ज्ञान

नई दिल्ली : स्टेट ऑफ द एजुकेशन रिपोर्ट फॉर इंडिया (चिल्ड्रेन विद डिसेबिलिटी) 2019 की रिपोर्ट में एक चैंकाने वाला खुलासा हुआ है। जिसमें बताया गया है कि भारत में पांच साल से लेकर 19 साल तक की आयु के तीन चैथाई दिव्यांग बच्चे अक्षर ज्ञान से पूरी तरह दूर है। यानी उन्हे क ख ग का भी ज्ञान नहीं है। रिपोर्ट में मोदी सरकार द्वारा दिव्यांग छात्रों को शिक्षा से जोड़ने और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाये जाने पर भी संतुष्टि जताई गई है। बता दे कि ये रिपोर्ट टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज द्वारा 2017-2018 के बीच शोध अध्ययनों के आधार पर तैयार की गई है। जिसे यूनेस्को ने भी मान्यता प्रदान की है।

दिल्ली में बुधवार को यूनेस्को और टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज की ओर से संयुक्त कार्यक्रम में सर्वे रिपोर्ट पेश की गई। यूनेस्को के दिल्ली निदेशक एरिक फाल्ट ने कहा कि भारत द्वारा विशेष वर्ग के लिए एक मजबूत कानूनी ढांचा, कार्यक्रम व योजनाओं को एक श्रेणी में डालने के मामले में काफी कार्य किया है। जिससे दिव्यांग छात्रों की नामांकन दर में भी सुधार देखने को मिला है। लेकिन ऐसे बच्चों के साथ शिक्षकों का व्यवार ठीक नहीं रहता है।

रिपोर्ट के अनुसार भारत में कुल 3,68,697 विशेष बच्चे ऐसे हैं जो पांच वर्ष से कम आयु के हैं। इनमें से 27 फिसदी छात्र स्कूलों में पढ़ने जाते हैं। वहीं 72 फिसदी बच्चे ऐसे हैं जो स्कूल नहीं गए। साथ एक फिसदी बच्चे बीच में ही स्कूल छोड़ देते हैं। वहीं 40,801 बच्चे ऐसे हैं जो विशष स्कूलों में पढ़ते हैं जिसमें 47 फीसदी बच्चियां और 53 फीसदी लड़के शामिल हैं। स्कूली शिक्षा में पांच से 19 वर्ष आयु वर्ग के तहत सामान्य बच्चों का आंकड़ा 70.97 और विशेष बच्चों का 61.18 फीसदी है।

वहीं 2014-15 से 2016-17 तक की तुलना मे प्राइमरी में बच्चों के इनरोलमेंट में कमी देखी गई है। 2014-15 में इसका आंकड़ा 15,67,633 था। लेकिन 2016-17 में 13,52,162 पहुंच गया है। इसके अलावा अपर प्राइमरी में भी इसके आंकड़े में कमी आई है और यह 750230 से गिरकर 745153 और सेकेंडरी में 219571 से 218261 तक पंहुच गया है।

साथ ही गुजरात, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र में जेंडर अनुपात में सेकेंडरी व हायर एजुकेशन में अंतर पाया गया है। हालांकि हिमाचल प्रदेश, पंजाब व तेलंगाना में विशेष लड़कियों की स्कूलों में संख्या अधिक पाई गई है।

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