“सैंया भये कोतवाल” इसलिए है, बिजली संकट

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गोविन्द मालू

पेयजल संकट फिर बिजली संकट अब सड़क संकट आने वाला है। उद्योगपति कमलनाथजी अपनी सरकार बचाने के लिए तबादलों का उद्योग खोल नेताओं, विधायकों को कमाई का खुला अवसर दे रखा है। मंत्री हास्यास्पद बयान देकर जनता की आंखों में धूल झोंक रहे हैं।जनता अपनी भूल पर पछतावा कर रही है।

खनिज निगम के पूर्व उपाध्यक्ष गोविन्द मालू ने कहा “ये हालात हैं मेरे मध्यप्रदेश के” सरकार के सभी मंत्री कहते है बिजली भरपूर है यानि भाजपा ने भरा पूरा बिजली खजाना छोड़ा था।अब आपको उसका व्यवस्थापन ना आये तो आप चाहें तो हमारे समय के ऊर्जा मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल को कुछ समय के लिए जिम्मेदारी दें,ताकि आपको विभाग सम्हालने की तमीज़ वे सिखाएं।

मालू ने कहा कि कोई मंत्रीकह रहा मेंटेनेंस ( जो हर साल होता है)भाजपा ने नहीं कराया,तो आप सरकार छोड़ दो, हम अभी कराते हैं। एक मंत्री कहतें हैं गांवों में ट्रांसफार्मर नहीं लगे ,तो श्रीमान भाजपा सरकार ने अपने शासन में 4 लाख 63 हजार ट्रांसफार्मर लगवाए थे,क्या काँग्रेस ने उन्हें बेचकर चुनाव के लिए पैसा जुटाया?

एक मंत्री कह रहे थे कि घटिया उपकरण खरीदे थे इसलिए संकट है तो तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह की फैक्टरी से ट्रांसफॉर्मर अन्य उपकरणों की खरीदी की गई उसकी आप जाँच करें, सप्लायर दोषी पाया जाए तो तुरंत कार्रवाई करें।”नाच ना जाने आँगन टेढा” काँग्रेस इस उक्ति को चरितार्थ कर रही है। आपने कहा घोटाला करना और दूसरों को चोर बताना काँग्रेस ने आपने आका से सीखा है,जनता तो यह जानना चाहती है कि बंटाढार दिग्गी शासन के समय के इलेक्ट्रॉनिक मीटर घोटाला किसका था?किसकी बिजली विभाग में उस समय चलती थी,सप्लायर कौन थे?

पुरानी बातें नए सन्दर्भ में ,समस्या की जड़ की पोल खोल देंगे।15 साल पहले जो लोग इस खेल को बाहर से निर्देशित कर खेल रहे थे अब खुद जिम्मेदारी में हैं “सैंया भये कोतवाल तो डर काहे का “
आपने कहा संकट की असली वजह यही है,जनता ने जवाब दे दिया है फिर समय आएगा और दे देगी।काँग्रेस बिल्ली बन कर दूध पीने की कोशिश ना करे।

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