खत्म नहीं हुआ कैश का जादू, एटीएम से निकासी 22 प्रतिशत बढ़ी

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नई दिल्ली। नोटबंदी के बाद केंद्र सरकार ने डिजीटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए काफी काम किया और भीम ऐप लांच कर पुरस्कार और कैशबैक ऑफर तक दिए, लेकिन ये सब बेअसर रहा। ये हम नहीं कह रहे हैं। ये बात आरबीआई द्वारा जारी आंकड़ों में स्पष्ट कही गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि नोटबंदी के बाद एटीएम से निकासी 22 प्रतिशत तक बढ़ी है। इससे यह साबित होता है कि लोगों ने डिजीटल पेमेंट के तरीके को पूरी तरह नकारा नहीं है, तो पूरी तरह अपनाया भी नहीं है। आज भी देश में बड़ी संख्या में कैश ट्रांजेक्शन में ही विश्वास ज्यादा है और यही कारण है कि कैश ट्रांजेक्शन एटीएम से 22 प्रतिशत बढ़ा है। यानि एटीएम से औसत निकासी 2.2 लाख करोड़ बढ़ी है।

एटीएम से कैश विदड्रॉल अप्रैल में सालभर पहले के मुकाबले 22 प्रतिशत बढक़र 2.6 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। यह जानकारी आरबीआई के आंकड़े से मिली है। इससे पता चलता है कि पिछले एक साल में डिजिटल पेमेंट्स को बड़े पैमाने पर अपनाए जाने के बावजूद करंसी का उपयोग कम नहीं हुआ है। यह आंकड़ा 8 नवंबर 2016 को सरकार की ओर से घोषित नोटबंदी के बाद के महीनों में एटीएम से करीब 2.2 लाख करोड़ रुपये की औसत निकासी से ज्यादा है।

अप्रैल में एटीएम में 75.9 करोड़ बार डेबिट कार्ड स्वाइप किए गए। यह सालभर पहले के मुकाबले 15 प्रतिशत  की बढ़ोतरी है। सालभर पहले आंकड़ा 66 करोड़ स्वाइप्स का था। इसके साथ ही पॉइंट ऑफ सेल्स टर्मिनल्स पर डेबिट कार्ड का उपयोग भी अप्रैल में बढक़र 33.3 करोड़ पर पहुंच गया। इसमें सालभर पहले के 26.8 करोड़ से 24 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई। इससे उलट अक्टूबर 2016 में पीओएस टर्मिनल्स पर डेबिट कार्ड केवल 14 करोड़ बार स्वाइप किए गए थे।

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