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गोवा के आर्कबिशप ने लिखी चिट्ठी, कहा लोकतंत्र खतरे में है

Posted on: 05 Jun 2018 04:33 by Ravindra Singh Rana
गोवा के आर्कबिशप ने लिखी चिट्ठी, कहा लोकतंत्र खतरे में है

पणजी: क्रिशचन सुमदाय के आर्कबिशप फादर फिलिप नेरी फेर्राओ ने कहा है, कि संविधान और लोकतंत्र खतरे में है और कई लोग असुरक्षा के माहौल में जीवन यापन कर रहे हैं, फिलिप नेरी ने यह बात ईसाई समुदाय को लिखे गए एक पत्र में उन्होंने कहा कि संविधान को ठीक से समझना जरुरी है, आर्कबिशप ने कहा है कि 2019 में होने वाला लोकसभा चुनाव नजदीक है, ऐसे में समुदाय को मानवाधिकार और संविधान की रक्षा के लिए आगे आना चाहिए।फिलिप नेरी ने यह भी कहा कि मानवाधिकारों पर किए जा रहे हैं और लोकतंत्र खतरे में देखा जा रहा है, उन्होंने 1 जून से पादरी  वर्ष की शुरुआत के अवसर पर जारी पत्र में गोवा एवं दमन क्षेत्र के ईसाई समुदाय को संबोधित किया गया है और इस पत्र में यह लिखा है, पादरी वर्ष 1 जून से 31 मई तक होता है।Image result for आर्कबिशप फादर फिलिप नेरी गोवा

इससे पहले बीते माह में दिल्ली के आर्कबिशप अनिल कूटो ने भी इसी तरह का एक पत्र में लिखा था. जिसपर राजनैतिक विवाद शुरू हो गया था. पत्र में उन्होंने ‘अशांत राजनैतिक वातावरण’ का ज़िक्र किया, जिसकी वजह से लोकतंत्र तथा धर्मनिरपेक्षता को खतरा है, तथा इसमें सभी पादरियों से वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले ‘देश के लिए प्रार्थना’ करने का आग्रह किया गया।

 

अनिल कूटो ने अपने एक पत्र में प्रार्थना अभियान शुरू करने और हर एक हफ्ते में 1 दिवस ‘देश की खातिर’ उपवास रखने के लिए कहा गया था, ख़त के साथ एक प्रार्थना भी पहुचे थी, जिसे अनिल कूटो के अनुसार साप्ताहिक सामूहिक प्रार्थना सभा में पढ़ा जाना चाहिए, ख़त की शुरुआत में अनिल कूटो ने लिखा था, “हम एक ‘अशांत राजनैतिक वातावरण’ देख रहे हैं, जो हमारे संविधान में निहित लोकतांत्रिक सिद्धांतों तथा हमारे देश के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप के लिए खतरा है…’खत में लिखा गया है, “देश तथा राजनेताओं के लिए हमेशा प्रार्थना करना हमारी प्रतिष्ठित परम्परा है, लेकिन आम चुनाव की ओर बढ़ते हुए यह और भी आवश्यक हो जाता है।

आगामी वर्ष 2019 को मद्देनजर रखते हुए जब हमारे पास नई सरकार होगी, तो आइए, हम देश के लिए 13 मई से शुरू करते हैं एक प्रार्थना अभियान’, राजनाथ सिंह ने दिल्ली के आर्कबिशप के ख़त का जवाब देते हुए उन्‍होंने कहा था कि देश में मजहब के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जाता है, भारत में सभी अल्पसंख्यक सुरक्षित हैं।

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