देश का ऐसा जेल जहां कैदी बसाते हैं अपनी गृहस्थी, बाहर करने जाते है नौकरी

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बेहद पुरानी जेल की चार दीवारों की जगह नए घर और परिवार वालों के साथ रहना, यह सब किसी भी कैदी को नसीब नहीं होता. लेकिन एक ऐसी जेल है जहा कैदी को जेल से बाहर निकलकर नौकरी तक करने दी जाती है. यह उसी जेल की तस्वीर है जहां कैदियों की ज़िन्दगी को बदला जाता है उनको जीने की एक नई सिख दी जाती है.  इंदौर जिले में हाल ही में शुरू की गई ओपन जेल को ऑफिशियल तौर पर देवी अहिल्याबाई खुली कॉलोनी नाम दिया गया है. हाल ही में 10 कैदियों को ओपन जेल अपार्टमेंट दिए गए हैं और उन्हीं में से एक अपार्टमेंट में भूपेंद्र सिंह ने रविवार से अपनी गृहस्थी बसायी है.

मध्यप्रदेश के शाजापुर इलाके के इस निवासी को पारिवारिक विवाद में एक युवक की हत्या के दौरान साल 1996 के मामले में गिरफ्तार किया गया था. इसके बाद उन्हें उम्रकैद की सजा सुनायी गयी थी. पिछले साढ़े बारह साल के दौरान वह सूबे की अलग-अलग जेलों में बंद रहे हैं. उनसे ओपन जेल के बारे में पुचा गया तो उन्होंने कहा कि, “उम्रकैद की मेरी सजा पूरी होने में फिलहाल कुछ समय बाकी है. लेकिन खुली जेल में आने के बाद मुझे लग रहा है कि मेरी अभी से रिहाई हो गयी है. मुझे अपने जुर्म पर पछतावा है और अब मैं आम नागरिक की तरह जीवन बिताना चाहता हूं.”

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सिंह ने बताया कि ओपन जेल में मुझे बाहर नौकरी करने की भी आज़ादी है तो मैं सोच रहा हूं कि, शहर में चाय-नाश्ते की दुकान खोलने की तैयारी कर लूं. ओपन जेल में उनकी पत्नी सीमा भी उनके साथ रह रही हैं. इस दम्पति के दो बेटे हैं जो इंदौर से बाहर पढ़ रहे हैं. अगले शैक्षणिक सत्र से उनका दाखिला किसी स्थानीय स्कूल में कराया जायेगा और वे भी अपने माता-पिता के साथ ओपन जेल में रह सकेंगे.

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सीमा ने कहा मैं अपने पति से बरसों दूर रही हूं और अपने दोनों बेटों की परवरिश की है. लेकिन हम खुश हैं कि हमारा परिवार अब साथ रह सकेगा. इस बीच, जिला और सत्र न्यायाधीश राजीव कुमार श्रीवास्तव ने खुली जेल के प्रयोग को सराहा है.

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उन्होंने कहा कई बार ऐसा होता है कि क्षणिक आवेग के कारण लोग गंभीर अपराध कर बैठते हैं. ऐसे लोग जब सजा के दौरान लम्बे समय तक सामान्य जेलों में बंद रहते हैं, तो उनके मन में सामाजिक तंत्र से बगावत करने और अन्य नकारात्मक भावनाएं घर कर जाती हैं. इन लोगों को नकारात्मक भावनाओं से बचाकर उनकी सामाजिक बहाली के लिये खुली जेल का प्रयोग सर्वश्रेष्ठ विकल्प है.

श्रीवास्तव ने कहा खुली जेल में सजा पूरी करने के बाद जब कैदी रिहा होंगे, तो वे समाज को और समाज उनको बेहतर तरीके से अपना सकेगा. खुली जेल जिला जेल की प्रशासकीय निगरानी में शुरू की गयी है. जिला जेल की अधीक्षक अदिति चतुर्वेदी ने बताया. उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देशों के मुताबिक प्रदेश में खुली जेलों का प्रयोग शुरू किया गया है।इन जेलों में अच्छे बर्ताव वाले उन कैदियों को रखा जाता है जिन्हें गंभीर अपराधों में उम्रकैद की सजा सुनायी गयी हो और इस दंड की अवधि एक से दो साल में खत्म होने वाली हो.

उन्होंने बताया कि खुली जेल में रहने वाले सभी कैदी सुबह छह बजे से शाम छह बजे तक इस परिसर के बाहर काम कर सकते हैं. लेकिन इस दौरान उन्हें शहर की सीमा लांघने की इजाजत नहीं है. चतुर्वेदी ने बताया कि जेल प्रशासन ने पूरी कोशिश की है कि खुली जेल का माहौल इसके नाम के मुताबिक रहे. फिर भी इसमें रहने वाले कैदियों और उनके परिवार की सुरक्षा के लिये तीन प्रहरियों की तैनाती की गयी है. ये प्रहरी जेल में आने-जाने वाले लोगों का पूरा रिकॉर्ड रखेंगे.

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