राजनीति से दूर भी है चौकीदार के महत्व , सदियों से हो रहीं पूजा |The importance of the janitor is far from politics, worshiping for centuries.

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प्रधानमंत्री मोदी का खुद को चौकीदार  कहने के बाद राजनीति में चारों ओर यह शब्द गुंज रहा है। विपक्ष भी अब इस शब्द का सहारा लेकर अपनी पकड को मजबूत बना रहे है। राजनीति फिलहाल दो हिस्सों में बटं गई है, एक ओर मैं भी चौकीदार   हूं की गुंज है, तो वहीं दूसरी ओर चौकीदार चौर है के नारे लग रहे है।

इन सब के अलावा भी देश में एक जगह ऐसी है जहां चौकीदार शब्द की अलग ही महत्वकांक्षा है। सदियों से गुजरात के नर्मदा जिले के डेडियापाड़ा तालुका के आदिवासी गांव देव मोगरा में चौकीदार की पूजा की जाती है। वहां की मान्यता है कि वह सालों से इस गांव की रक्षा कर रहे हैं।

गांव के निवासियों का कहना है कि चुनावी दौर में हम इन दिनों चौकीदार  शब्द के बारे में बहुत कुछ सुन रहे हैं। लोग आजकल अपने नाम में चौकीदार  को जोड़कर गर्व महसूस कर रहे हैं लेकिन हम लंबे समय से चौकीदार की पूजा कर रहे हैं।

गांव के लोगो के अनुसार, सदियों पहले एक बार पंडोरी माता नाराज होकर घर छोड़कर चली गई थीं, जिसके बाद राजा पंडादेव उन्हें ढूंढते हुए देव मोगरा गांव आ गए थे। जिसके बाद यह स्थान पूजनीय बन गया, यहां पंडोरी माता का एक मंदिर बनाया गया। मंदिर से थोड़ी सी दूरी पर देवदारवनिया चौकीदार  का मंदिर भी बनाया गया है।

ऐसा माना जाता है कि देवदरवनिया चौकीदार  और पंडोरी माता हमारी रक्षा करते हैं। भक्त पंडोरी माता की पूजा करने के पहले चौकीदार  मंदिर में पूजा करते हैं, जिसकेे बाद ही माता के दर्शन करने जाते है। देश में हर जगह से यहां भक्त माता के दर्शन करने आते है।

वेसे तो साल भर ही यहां भक्तों का जमावडा रहता हैं, पर दिपावली और नवरात्रि के दौरान यहां भीड़ बढ़ जाती है।

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