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भारत में पर्यटन उद्योग की ग्रोथ दक्षिण एशिया में सर्वाधिक

Posted on: 29 Apr 2019 14:56 by Surbhi Bhawsar
भारत में पर्यटन उद्योग की ग्रोथ दक्षिण एशिया में सर्वाधिक

नीरज राठौर

दुनिया भर में अपने देश से दूसरे देश की यात्रा करने वाले अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की संख्या में 2017 में रेकॉर्ड वृद्धि देखी गई है। यह संख्या पुरे विश्व की मिलाकर 132.3 करोड़ रही। इसमें भी दक्षिण एशियाई देशों में सबसे अधिक विदेशी यात्री भारत पहुंचे और वह शीर्ष पर रहा। संयुक्त राष्ट्र के पर्यटन संगठन के आंकड़ों में यह बात सामने आई है।

देश में पर्यटकों की आवाजाही में वृद्धि के रूप में पर्यटन उद्योग में प्रगति स्पष्ट रूप से नजर भी आ रही है, भारत में आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या 2017 में 1.55 करोड़ रही जो 2016 में 1.45 करोड़ थी। इससे भारत की आय 2017 में बढ़कर 27.36 अरब डॉलर रही जबकि 2016 में यह आंकड़ा 22.42 अरब डॉलर था। पूरे दक्षिण एशिया में अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों का आगमन 2017 में बढ़कर 2.65 करोड़ रहा जो 2016 में 2.51 करोड़ था। इसी प्रकार इससे होने वाली आय 2017 में बढ़कर 39.52 अरब डॉलर हो गई जबकि 2016 में यी 33.28 अरब डॉलर थी।

इस लिहाज से भारत में पर्यटन के मोर्चे पर 14 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई जो वैश्विक औसत 6.8 प्रतिशत और एशियाई औसत 5.7 प्रतिशत से काफी अधिक है। हालांकि घरेलू पर्यटन की वृद्धि महज 2.3 प्रतिशत रही। यह बढ़िया बुनियादी ढांचे के अभाव और लागत के मोर्चे पर नाकामी को दर्शाता है।

भारत में पर्यटन सबसे बड़ा सेवा उद्योग है, जहां इसका राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 6.23% और भारत के कुल रोज़गार में 8.78% योगदान है। भारत में वार्षिक तौर पर 5 मिलियन विदेशी पर्यटकों का आगमन और 562 मिलियन घरेलू पर्यटकों द्वारा भ्रमण परिलक्षित होता है। 2008 में भारत के पर्यटन उद्योग ने लगभग US$100 बिलियन जनित किया और 2019 तक 9.4% की वार्षिक वृद्धि दर के साथ, इसके US$ 275.5 बिलियन तक बढ़ने की उम्मीद है। भारत में पर्यटन के विकास और उसे बढ़ावा देने के लिए पर्यटन मंत्रालय नोडल एजेंसी है और “अतुल्य भारत” अभियान की देख-रेख करता है। भारत में पर्यटन के मामले में विदेशी पर्यटकों की बढ़ती आवक एक अच्छा संकेत जरूर है, लेकिन हम अभी भी इस उद्योग की पूरी संभावनाओं को भुना नहीं पा रहे हैं।

इसके लिए ‘अतुल्य भारत’ और ‘अतिथि देवो भव:’ जैसे स्लोगनों को व्यापक योजनाओं के साथ सिरे चढ़ाना होगा। इसके तहत बड़ी संख्या में किफायती होटलों का निर्माण, मनोरंजन के लिए भी नई किस्म के विकल्प तैयार करने होंगे। म्यूजियम और आर्ट गैलरी बनानी होंगी। विरासत स्थलों की दशा सुधारनी होगी। कनेक्टिविटी बढ़ानी होगी। गाइड्स, म्यूजियम एवं आर्ट गैलरी कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों को प्रशिक्षित करना होगा। केंद्र एवं राज्य सरकारों के अलावा निजी क्षेत्र के बीच बेहतर जुड़ाव की जरूरत है। इन सबसे बढ़कर पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी। पर्यटक ऐसी सुखद स्मृतियों के साथ वापस लौटें कि वे देर-सबेर उस स्थान पर दोबारा आने की योजना बनाएं।

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