सरकार हिला देने वाला चला गया

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George Fernandes

मुकेश तिवारी
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स्वभाव से जिद्दी, विद्रोही और फक्कड़ दम। तेवर तीखे। संकल्प के पक्के। जो ठान लेते वह करके दिखाते। नेतृत्व क्षमता ऐसी कि सरकारें हिला दिया करते थे। जिस आंदोलन में वह कूद पड़े याआंदोलन का नेतृत्व करने लगे तो सरकार अतिरिक्त सावधानी बरतना शुरू कर देती थी। उनकी हर गतिविधि पर कड़ी नजर रखी जाती थी। कारण था वह पूरे देश में एक बार एक साथ रेल यातायात ठप करवा चुके थे। वर्ष 1974 में 8 मई की तारीख से शुरू हुई उस हड़ताल को आज भी देश की सबसे बड़ी हड़ताल में गिना जाता है।

जॉर्ज फर्नांडिस के न रहने की खबर उस बिरादरी के लिए झटका है जो आम आदमी, गरीब और मजदूर के हितों की लड़ाई सड़क पर उतरकर सरकारों से लड़ती आई है। उस बिरादरी ने आज अपना बड़ा नेता खो दिया है। जॉर्ज का शुरुआती राजनीतिक करियर बहुत चमकदार रहा। मजदूर नेता के रूप में उन्होंने खूब नाम कमाया।

जब तक विपक्ष में रहे सत्ताधीशो की नाक में दम करते रहे। सार्वजनिक मंच हो या संसद जब वह बोलने खड़ा होते थे तो उस वक्त के सारे नेता उनकी बात को ध्यान से सुना करते थे। देश में आपातकाल लगा तो फर्नांडीस संभवत विपक्ष के पहले ऐसे बड़े नेता थे जो लम्बे समय तक पुलिस के हाथ नहीं आए थे। वह रूप बदलकर घूमते रहे और आंदोलन को गति देते रहे। हालांकि सत्ता में आने के बाद जॉर्ज विवादों में घिरे और पिछले कई वर्षों से लगातार खराब स्वास्थ्य के कारण वह गुमनामी के अंधेरों में चले गए थे। उनके निधन के साथ पुरानी पीढ़ी का एक बड़ा नेता देश ने आज खो दिया है।

लेखक घमासान डॉट कॉम के संपादक हैं.

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