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कर्नाटक का वो चुनाव, जिसमे एक ‘नारे’ ने बदल दी थी चुनावी तस्वीर

Posted on: 02 May 2018 05:48 by Surbhi Bhawsar
कर्नाटक का वो चुनाव, जिसमे एक ‘नारे’ ने बदल दी थी चुनावी तस्वीर

कर्नाटक: कर्नाटक में 12 मई को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए पार्टियों ने अपनी पूरी ताकत झोक दी है। कर्नाटक के चुनावी रण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उतर आए है। मंगलवार को मोदी में कर्नाटक में रैली के दौरान राहुल पर कई वार किए। मोदी के राहुल पर किए गए हमले से राजनीति फिर गरमा गई है और आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो गया है।

इसी बीच हम आपको कर्नाटक चुनाव का एक ऐसा किस्सा बताने जा रहे है जिसने चुनाव की पूरी तस्वीर बदल दी थी।

राजनीति में ‘नारों’ की अहम भूमिका होती है और कई बार ये निर्णायक साबित होते हैं। ऐसा ही एक नारा देश की राजनीति में वर्ष 1978 के उपचुनावों में आया था और बहुत चर्चित हुआ। वह नारा था ‘एक शेरनी सौ लंगूर, चिकमगलूर-चिकमगलूर’। यह नारा पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के लिए गढ़ा गया था।

वह उप चुनाव में कर्नाटक के चिकमगलूर से पूर्व मुख्यमंत्री वीरेंद्र पाटिल के खिलाफ उम्मीदवार थीं।उस चुनाव में इंदिरा गांधी ने हर दिन 17-18 घंटे प्रचार किया और अंतत: उन्होंने 77 हजार से ज्यादा वोटों से जीत द  र्ज की थी। इस चुनाव में इंदिरा गांधी के खिलाफ लड़ रहे 26 उम्मीदवारों की तो जमानत जब्त हो गई थी।

राजनीति में इंदिरा गांधी की वापसी के लिए जिस ‘नारे’ ने जमीन तैयार की थी उसे दक्षिण भारत के कांग्रेसी नेता देवराज उर्स ने लिखा था। इस नारे का सिर्फ कर्नाटक ही नहीं, बल्कि पूरे देश की राजनीति पर अहम प्रभाव पड़ा और कांग्रेस को इसका फायदा मिला। धीरे-धीरे कांग्रेस ने सत्ता में वापसी की।

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