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देश की भक्त परंपरा…..ऋषिकेश राजोरिया की कलम से….

Posted on: 08 Jun 2018 16:40 by krishnpal rathore
देश की भक्त परंपरा…..ऋषिकेश राजोरिया की कलम से….

यह देश भक्तों से भरा हुआ है। इस देश में धर्म के अलावा राजनीति भी शुरू से ही भक्ति पर आधारित रही है। कांग्रेसी गांधी के भक्त कहलाते थे और हैं। हालांकि पहले भक्त का संबंध भगवान से माना जाता था, लेकिन बाद में लोकतंत्र की राजनीति शुरू होने के बाद नेताओं के भक्त बनने लगे और धार्मिक व्यवस्था में गुरुओं के भक्तों की संख्या बढ़ने लगी। भगवान के बारे में चिंतन मनन बंद हो गया और गुरुओं को भगवान का दर्जा मिलने लगा। कई फकीर और संत हजारों लाखों लोगों के गुरु बन गए। इनमें साईं बाबा का पहले नंबर पर हैं, जिनको भगवान का दर्जा दिया जा चुका है। साईं बाबा प्रथम के बाद साईं बाबा द्वितीय के भी बड़ी संख्या में भक्त थे। उत्तर भारत में जय गुरुदेव के भक्तों की संख्या बढ़ी।

राधा स्वामी सत्संग ब्यास नामक संस्था बनी तो उसके गुरु को पूजने का काम शुरू हुआ। आसाराम बापू के भी लाखों की संख्या में भक्त बन गए, जो इन दिनों दुष्कर्म के आरोप में जेल की सजा काट रहे हैं। डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख बाबा गुरमीत राम रहीम भी इसी श्रेणी में आ गए हैं। राजनीति में सक्रिय सतपाल महाराज के भी भक्त कम नहीं हैं। हरियाणा में बड़े प्रयासों के बाद पकड़े गए रामपाल महाराज के भी बड़ी संख्या में भक्त हैं। एक बिहार के संत हैं जो आशुतोष महाराज होकर अपार संपत्ति के स्वामी बन गए हैं और फिलहाल उनकी देह एक फ्रीजर में सुरक्षित रखी हुई है। उनके भक्तों का कहना है कि बाबा ने समाधि ली है और वे कभी भी देह में लौट सकते हैं। राजनीति में सबसे पहले कांग्रेस का अखिल भारतीय विस्तार हुआ। सभी कांग्रेसी गांधी के भक्त हैं। गांधी राजनीतिज्ञ तो थे ही, वे धार्मिक चोला भी पहने हुए थे और यह दिखाने की कोशिश करते थे कि उनकी जीवन शैली आध्यात्मिक है। खान-पान पर नियंत्रण, परहेज, उपवास आदि उनकी जीवन शैली में शामिल थे।

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बाद में राजनीति आगे बढ़ी तो और भी बड़े नेता हुए और उनके भी भक्त होने लगे। तेलुगु देशम पार्टी के लोग पहले एनटी रामाराव के भक्त थे, अब चंद्रबाबू नायडू के भक्त हैं। तमिलनाडु में जयललिता के भक्तों की बड़ी संख्या थी, जिनके दम पर उन्होंने तमिलनाडु में दो बार से ज्यादा मुख्यमंत्री पद संभाला। उनकी पार्टी अन्नाद्रमुक है, जो अभी भी दिवंगत जयललिता के नाम पर चल रही है। तमिलनाडु की दूसरी प्रमुख पार्टी द्रमुक के लोग करुणानिधि के भक्त हैं। उत्तर भारत में समाजवादी धारा के जितने बड़े नेता थे, उनके अलग-अलग भक्त बन गए। सबसे पहले लोहिया के समर्थकों का गुट बना। उनमें से मुलायम सिंह, लालू प्रसाद, नीतीश कुमार आदि ने अलग-अलग पार्टियां बना ली। बाद में उनके भी अलग अलग भक्त हो गए।

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राजनीति में भारतीय जनता पार्टी एकमात्र पार्टी थी, जिसके नेता कार्यकर्ता किसी व्यक्ति विशेष के भक्त नहीं बने थे। अटल बिहारी वाजपेयी भाजपा के सबसे बड़े नेता थे, लेकिन उनकी भक्ति के सिलसिले ने जोर नहीं पकड़ा। लेकिन अब भाजपा भी भक्ति परंपरा में शामिल हो गई है। जब से नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री बने हैं, मोदी भक्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है। उनके पीछे दूसरे नंबर पर अमित शाह हैं। उनकी कामयाबी का सिलसिला आगे भी जारी रहा तो उनके भक्तों की संख्या भी बढ़ेगी, इसकी पूरी संभावना है।

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