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मुजफ्फरपुर : जिस अस्पताल में हो रही बच्चों की मौत, उसी के पीछे मिले नरकंकाल

Posted on: 22 Jun 2019 20:11 by bharat prajapat
मुजफ्फरपुर : जिस अस्पताल में हो रही बच्चों की मौत, उसी के पीछे मिले नरकंकाल

बिहार के मुज्फ्फरपुर में एक चैंकाने वाले खुलासा हुआ है। दरअसलल, यहां के सरकारी श्री कृष्णा मेडिकल काॅलेज व अस्पताल के पीछे नरकंकाल मिलने सक हड़कंप मच गया है। बता दे कि यह वहीं अस्पताल है जहां पर चमकी बुखार से पीड़ि बच्चों का इलाज चल रहा है। बताया जा रहा है कि लावारिस लाशों का पोस्टमार्टम नहीं किया गया और इन्हे अंतिम संस्कार किए बिना ही अस्पताल के पीछे फेंक दिया गया। इस मामले में प्रशासन का कहना है कि इस मामले में जांच कर कमिटी गठित की जाएगी। जफ्फरपुर के जिलाधिकारी (डीएम) आलोक रंजन घोष द्वारा अस्पताल प्रशासन से इस मामले में रिपोर्ट तलब की गई है।

गौरतलब है कि करीब ढाई साल पहले एसकेएमसीएच में नर कंकालों की तस्करी का खुलासा हुआ था। बताया जा रहा है कि अस्पताल में बड़ी संख्यां मे नरकंकाल मिलने के साथ ही महिला-पुरुषों के फेंके गए कपड़े भी मिले हैं। वहीं एसकेएमसीएच के अधीक्षक एसके शाही ने मानव कंकालों के मिलने की बात कही है। उन्होने कहा कि पोस्टमार्टम हाउस कॉलेज प्रिंसिपल के अधिकार क्षेत्र में आता है। वह प्रिंसिपल से बात करेंगे और जांच समिति का गठन करने की बात कहेंगे।

उन्होंने कहा कि ऐसी लापरवाही की जांच जरुरी है। मानवीय संवेदना को ध्यान में रखते हुए शवों का अंतिम संस्कार किया जाना चाहिए न कि उसे यूं ही फेंक दिया जाना चाहिए। बता दे कि नियमों के मुताबिक अज्ञात शवों के अंतिम संस्कार के दौरान एक पुलिसकर्मी की उपस्थिति रहती है। लेकिन फिर भी शवों को ऐसे ही क्यों फेंका जा रहा है, यह जांच का विषय है।

गौरतलब है कि नवंबर 2016 में एसकेएमसीएच में नर कंकालों की तस्करी का खुलासा हुआ था। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार खुलासे में अज्ञात शवों के कंकालों का अवैध व्यापार किए जाने की बात भी कही गई थी। वहीं मामले का खुलासा होने के बाद तत्कालीन सिविल सर्जन ललित सिंह ने इसकी जांच करवाई थी।

एसकेएमसीएच में करीब ढाई साल पहले नर कंकालों की तस्करी का खुलासा हुआ था। प्रभात खबर की रिपोर्ट के अनुसार एक मीडिया स्टिंग ऑपरेशन में खुलासा किया गया था कि अज्ञात शवों के कंकालों का अवैध व्यापार किया जाता है। नवंबर 2016 में खुलासा होने के बाद तत्कालीन सिविल सर्जन ललित सिंह ने मामले की जांच करवाई थी।

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