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ठंडे मुल्क के लोगों ने दुनिया में फैला रखे पांव

Posted on: 06 Jan 2019 12:39 by Surbhi Bhawsar
ठंडे मुल्क के लोगों ने दुनिया में फैला रखे पांव

मुकेश नेमा

आप इतिहास ,भूगोल जो=जो आप इस ठंड में उठा सकें सब उठा कर देख लें। उन्ही मुल्को ने तरक्की की है जहाँ के बाशिंदे नहाते नही है। नहाते नही से मेरा मतलब जो रोज नही नहाते। अमेरिका हो ,जर्मनी हो ,जापान हो ,इंगलैंड हो यहाँ के रहने वालो से पूछ कर देखिये। उन्हे रोज नहाने जैसी बात से ही ताज्जुब होगा।

वैसे मुझे कभी इस बात पर भी ताज्जुब होता था कि इन ठंडे मुल्क के रहने वालो ने अपने पाँव पूरी दुनिया मे कैसे फैला रखे हैं। ठंड के मौसम मे तो हम अपने कम्बल मे भी पाँव फैला नही पाते। मेरे ख्याल से ये केवल रोज ना नहाने की नीति से ही मुमकिन हो सका है।

पानी ही वो चीज है जो ठंड के डर को सौ गुना तक बढा देती है। पिछले हजारो साल से हमारी माँये बच्चो को सुबह-सुबह ही नहाने का फरमान सुनाती आई हैं। बच्चा धडकता दिल लिये रजाई मे पडा रहता है। डरते-डरते बडा होता है और फिर मन मे बैठा यही डर उसे जिंदगी भर कभी कुछ नया नही करने देता। इसी डर की वजह से हम हमेशा रजाई मे घुसे रह गये और इन ठंडे देशो के रोज ना नहाने वाले हम पर सैकडो सालो तक राज करते रहे।

हम नहाने के ऐसे धुनी हुये कि नहाते ही रह गये। ये भी नही सोचा हमने की दुनिया मे नहाने के अलावा और भी बहुत से करने लायक काम है। हमने ये भी नही सोचा कि नहाने के लिये पानी बचा रहे ये भी जरूरी है। नहा-नहा कर हमने इस देश की सारी नदियाँ , कूए ,तालाब ,बाबडियाँ खाली कर दी। उन पर कॉलोनियाँ तान दी ,बोरिंग कर-कर के जमीन का सारा पानी चूस लिया और अब आजकल नगर निगमो के मँहगे टैंकर के पानी से नहा रहे हैं।

ठंडे मुल्को मे रहने लोग इतने समझदार होते हैं कि नहाने की बात तो छोडिये पीने के लिये भी पानी का इस्तेमाल नही करते। ये जानते है कि दुनिया मे पानी की कमी है इसलिये बीयर पीकर ही जिंदा रह लेते है। रूस ने यही गलती की। हमारी देखा देखी रोज रोज नहाने लगे रूसी। नतीजा देख ही रहे हैं हम लोग।दस टुकडे हो चुके उस महान देश के ,अब कोई पूछता नही उन्हे !रूस की दुर्दशा देख चीन की सरकार ने समझदारी दिखाई। बता दिया पब्लिक को कि बस माओ के जन्मदिन और मरणदिन पर ही नहाना है। वहाँ की सरकार हमारे बापो से ज्यादा सख्त है। उसकी बात ना मानो तो लातो के साथ गोली भी लगने की ग्यारंटी है। चीनियो ने अपनी सरकार की बात मानी। बिना नहाये धोये ,भूतो की तरह काम मे जुटे और नतीजा आप देख ही रहे है। हमारा सारा धन बह बह कर चीन की तरफ चला जा रहा है। वो सुबह सुबह हमारे यहाँ सडक बनाने चले आते है और हम केवल इसलिये अपनी रजाई से बाहर नही निकलते क्योकि रजाई से निकलने का मतलब नहाना होता है। और चीन ही क्यो उत्तर कोरिया वाले किम जोंग ने भी नहाने मे लगने वक्त को मिसाईल बनाने मे लगाया। ना खुद नहाता है वो कभी ना अपने देशवासियो को नहाने देता है। सोचिये यदि वो नहाता रह जाता तो क्या ट्रंप को डरा पाता। दरअसल ये रोज रोज ना नहाने वालो के बीच का झगडा है और इसमे वही जीतेगा जो दूसरो से कम बाथरूम इस्तेमाल किया होगा।

हमारी और हमारे बाप दादाओ की अम्माये तो गलती कर चुकीं। ना वो हमें रोज नहाने के लिये मजबूर करती ना हम इतने डरपोक होते। नहाने के अंहकार ने हमें पसीना बहाने से रोका। नतीजतन देश लम्बे अरसे तक गुलाम रहा और अब तक ना नहाने वालो जितना अमीर और बहादुर हो नही हो पाया है।

इन सभी मुद्दो पर सोच विचार करने के बाद आजकल की मम्मियो को मेरी यही सलाह है कि वे अपने बच्चो को नहाने के डर के साथ बडा ना करें। हमारे देश की तरक्की का ,एकता अंखडता का यही इकलौता रास्ता है और ये रास्ता चाहे जहाँ से होकर गुजरता हो बाथरूम से होकर तो हरगिज नही गुजरता ।

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