इस बार कुछ खास है पुष्य नक्षत्र, जमकर करे खरीदी

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pushya nakshatra

पौराणिक मान्यताओं और पंडितों के अनुसार यह माना जाता है कि दीपोत्सव से पहले आने वाले पुष्य नक्षत्र में खरीदी गई वस्तु फलदाई होती है, वह समृद्धि कारक होती है,या अनंत काल तक स्थिर रहती है। पुष्य नक्षत्र को सुख-शांति व धन-संपत्ति के लिए अत्यंत पवित्र माना गया है। पुष्य नक्षत्र सभी नक्षत्रों का राजा है।

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इस दिन खरीदारी, भूमि पूजन, लेन-देन करना शुभ माना जाता है। कल याने 31 अक्तूबर बुधवार को पुष्य नक्षत्र सुबह 3:50 बजे से शुरू होगा जो रात 2:33 बजे तक रहेगा। दीपावली त्यौहार से पहले खरीदी का सबसे अच्छा मुहूर्त सुबह 6:32 से देर रात.. 12:08 बजे तक रहेगा।

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शनिदेव को इस पुष्य नक्षत्र का दिशा प्रतिनिधि माना जाता है। बृहस्पति इस नक्षत्र के देवता माने गए है । बृहस्पति शुभता बुद्धिमत्ता ज्ञान का प्रतीक है शनि स्थायित्व के प्रतीक है, इसलिए दोनों का योग मिलकर पुष्य नक्षत्र को शुभ और चिरस्थाई बना देता है यह 28 नक्षत्रों में 8वां नक्षत्र है ।

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अहोई अष्टमी एब बड़े व्रत के तौर पे मनाया जाता है। पुष्य नक्षत्र के दिन इस व्रत का आना इसे और भी विशिष्ठ बनाता है। लेकिन पंडितों के अनुसार बुधवार को दोपहर 11:46 से 12:31 तक के समय का यथासंभव त्याग करना चाहिए।

पुष्य नक्षत्र पर सोने चांदी के साथ इलेक्ट्रॉनिक सामान बर्तनों की भी खरीदी लोगों द्वारा जमकर की जाती है ।

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