शरद पूर्णिमा के दिन इंदौर में बिकता है खास चापड़ा | Autumn special candle sells at Indore on Sharad Purnima

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chapda

इंदौर। शरद पूर्णिमा के दिन साल में एक ही बार इंदौर के पुराने इलाकों में कुल्फी और गजक की दुकानों के साथ ही कुछ ठेले पर पहाड़नुमा डिजाइन जैसी जो आकृति दिखती है उसको चापड़ा कहते हैं।
यह सिर्फ आज ही के दिन बनता है, और आज ही के दिन बिकता है।बरसों पुरानी इसको बनाने और खाने की अलग-अलग मान्यताएं हैं। शायद देश में ऐसा कोई शहर है, जहां पर यह खास आइटम खाने को मिलता है। इस आइटम को खाने वाले पुराने लोगों का कहना है कि हम साल भर तक इसका इंतजार करते हैं।

https://youtu.be/5HmHS1RKQqs

माल गंज चौराहे पर रहने वाले कृष्णदास नीमा का कहना है कि यह चापड़ा खाने का मजा अलग ही है। इसको हम खीर के साथ खाते हैं। तो उसका स्वाद अलग ही आता है। वैसे तो शरद पूर्णिमा के अलावा कभी यह चापड़ा नहीं बनता, लेकिन यदि इसको हम शरद पूर्णिमा के दिन खरीद कर दो-चार दिन बाद भी खाना चाहें तो ऐसा मजा नहीं आता जैसा शरद पूर्णिमा के दिन आता है।

इस बारे में हमने पुराने उन लोगों से बात की जिनका परिवार साठ साल साल से बनाता आ रहा है। देखिए यह वीडियो। जिसमें आपको बताया जा रहा है कि चापड़ा कैसा दिखता है। उसको बनाने की विधि बता रहे हैं पियूष नीमा। जो की चौथी पीढ़ी इसको बेच रही है। चापड़ा की कीमत लगभग चार सौ रुपए किलो है।

https://youtu.be/gibztrQ_R1w

पुराने इंदौर के लोग इसे जरूर खाते हैं। नई पीढ़ी को इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है, लेकिन जो पुराने परिवार है।उसमें त्यौहार के हिसाब से खीर के साथ इसको जरूर खाया जाता है।

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