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नई रंगकर्मी संस्था मालवा आर्ट आफ ड्रामा का धमाकेदार अभ्युदय

Posted on: 26 Mar 2019 15:41 by Mohit Devkar
नई रंगकर्मी संस्था मालवा आर्ट आफ ड्रामा का धमाकेदार अभ्युदय

चंद्रशेखर बिरथरे

मा. आ.आ. ड्रामा के द्वारा नारी उत्पीड़न पर लिखी विश्व स्तरीय कविताओं का दृश्य पाठ ” वामा ” शीर्षक से इन्दौर प्रेस क्लब के माथुर हाल में प्रस्तुत किया गया ।

शहर की वरिष्ठ महिला रंग कर्मियों द्वारा प्रस्तुत यह दृश्य पाठ गहरे से अपना प्रभाव छोड़ गया । श्री दिनेश दीक्षित द्वारा निर्देशित यह विश्व स्तरीय कविताओं का कोलाज एक अद्भुत अनूठा प्रयोग साबित हुआ । वाचिक अभिनय की प्रचुरता लिए यह प्रस्तुति कविताओं को एक आलेख की तरह प्रस्तुत कर रही थी , परंतु मंच पर अपनी अभिनय प्रतिभा का उत्कृष्ट परिचय देती अभिनेत्रियों में से प्रमुख रूप से सूश्री प्रतीक्षा जैन नैयर , सुश्री भवानी कौल , सुश्री दिक्षा सेंगर ,अंजलि बिरथरे एवं अन्य नवागत अभिनेत्रियों ने पाठ को अपनी अभिनय श्लाघा से , स्पष्ट उच्चारण से ,सटीक भाव भंगिमा से , वाणी के उतार-चढ़ाव से , शारीरिक भाषा से सजीव किया , अलबत्ता सूश्री अंजलि बिरथरे को अपनी आवाज की गहराई , पेस पर काम करने की आवश्यकता है ऐसा प्रतीत हुआ ।

स्त्री जीवन की पुष्प से तुलना सटीक थी परंतु इसी जीवन में अंकुरण से कली और पूर्ण योवन प्राप्त पुष्प की यात्रा में भी नष्ट-विनष्ट , क्षत-विक्षत हो जाने के बहुतेरे अवसर आते हैं , अक्सर माली ही इसका प्रमुख कारण बनते हैं । और अबला नारी अब सबला बन स्थापित हो चुकी है । यह बात भी महत्वपूर्ण है । नरेश सक्सेना जी की चंबल पर लिखी कविता और प्रसंगो के अभिनय ने बेइंतेहा प्रभावित किया । स्त्री की साड़ी से नदी के प्रतिमान का निर्वाह बहुत मार्मिक बन पड़ा । छोटी , मंझली , बड़की बेटियों की जल समाधि का प्रसंग हृदय को छू जाता है ।
कई बार गंभीर शब्दों को बेवजह खींच तान कर उच्चारित किया गया जिससे संवाद की गुणवत्ता प्रभावित हुई । कविताओं मेकई बार गंभीर शब्दों को बेवजह खींच तान कर उच्चारित किया गया जिससे संवाद की गुणवत्ता प्रभावित हुई । कविताओं में दिए गए शब्दों चित्रों की सीमा के कारण चूकिं चरित्र भली-भांति स्थापित नहीं हो पाते , इसलिए भी अभिनय पूर्ण परिभाषित नहीं हो पाया , हालांकि अभिनेत्रियों ने अपनी अभिव्यक्ति में कोई कसर नहीं छोड़ी ।
फिर भी एक विशेष प्रस्तुति के लिए पूरी टीम को बधाई ।

गौरव राजावत का संगीत संयोजन दृश्य पाठ की मांग के अनुरूप था ।सुरभि बोर्दिया का प्रकाश संयोजन विषयानुरूप रहा ।
छोटे स्टेज के कारण अभिनेत्रियों का की गति विधान बाधित होता रहा।
प्रस्तुति के बाद विभिन्न संचालन कर्ताओं ने पुरस्कार वितरण की व सम्मान की वेला को अति दीर्घ कर दिया और शायद इसी कारण दर्शकों का आभार ज्ञापन नहीं हो पाया ।

चंद्रशेखर बिरथरे

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