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राजस्थान बॉर्डर पर पाक -सेना को रोकता माता का मंदिर

Posted on: 13 Jun 2018 10:23 by shilpa
राजस्थान बॉर्डर पर पाक -सेना को रोकता माता का मंदिर

नई दिल्ली :प्राचीन काल में जब मंदिर बनाए जाते थे तो वास्तु और खगोल विज्ञानं का ध्यान रखा जाता था। भारत में ऐसे हजारो रहस्यमय मंदिर है । आज हम आपको बता रहे राजस्थान के तनोट माता राजस्थान के बारे में

तनोट माता का मंदिर, राजस्थान:

भारत में माता के अनेकों मंदिर है ,हर मंदिर की कोई मान्यता या कोई रहस्य होता है जैसे ये तनोट माता का मंदिर। माँ का मंदिर जैसलमेर जिले से लगभग 130 कि.मी. की दुरी पर स्थित है। तनोट माँ को हिंगलाज माँ का ही एक रूप है। हिंगलाज माता जो वर्तमान में बलुचिस्थान जो पाकिस्तान में है ,वहा स्थापित है ।

इस मंदिरकी स्थापना वि.सं. 828 में भाटी राजपूत नरेश तनुराव ने मूर्ति स्थापित कर की थी .भाटी तथा जैसलमेरके पडोसी इलाकोके लोग आज भी यहाँ माता में गहरी आस्था रखते है और दुरदुर से यहा पूजा करने आते है ।

सितम्बर 1965 में भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध शुरू हुआ। तनोट पर आक्रमण से पहिले पाकिस्तानी सैनिक पूर्व में किशनगढ़ से 74 किमी दूर बुइली तक पश्चिम में साधेवाला से शाहगढ़ और उत्तर में अछरी टीबा से 6 किमी दूर तक कब्जा कर चुका था। तनोट लगभग तीनो दिशाओं से घिरा हुआ था। शत्रु अगर तनोट पर कब्ज़ा कर लेता तो रामगढ़ से लेकर शाहगढ़ तक के इलाके पर अपना दावा कर सकता था । युद्ध की ऐसी स्थिति में तनोट पर अपना अधिकार रखना दोनों सेनाओ के लिए महत्वपूर्ण बन गया था ।

दुश्मन ने तनोट माता के मंदिर के आसपास के क्षेत्र में करीब 3 हजार गोले बरसाएँ पंरतु अधिकांश गोले अपना लक्ष्य चूक गए। ये घटना अपने सैनिकोंका मनोबल बढ़ने के लिए काफी है। अकेले मंदिर को निशाना बनाकर करीब 450 गोले दागे गए परंतु चमत्कारी रूप से एक भी गोला अपने निशाने पर नहीं लगा और मंदिर परिसर में गिरे गोलों में से एक भी नहीं फटा और मंदिर को खरोंच तक नहीं आई।
अब अपने सैनिकों का उत्साह चरम पर था ,कम सैनिक होने के बावजूद पुरे आत्मविश्वास के साथ दुश्मनों के हमले का करार जबाब दिया और सैकड़ो पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया . बची हुई दुश्मन सेना जान बचाकर भागने के लिए मजबूर हो गई . कहते हैं सैनिकों को माता ने स्वप्न में आकर कहा था कि जब तक तुम मेरे मंदिर के परिसर में हो मैं तुम्हारी रक्षा करूँगी।

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