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बीजेपी की विजय यात्रा के बीच खड़े सिद्धारमैया अब तक राजनीति के कई उतार-चढ़ाव देख चुके हैं

Posted on: 14 May 2018 17:43 by Lokandra sharma
बीजेपी की विजय यात्रा के बीच खड़े सिद्धारमैया अब तक राजनीति के कई उतार-चढ़ाव देख चुके हैं

#कर्नाटक_किसका

मंगलवार को कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री का पता लग जाएगा. बीजेपी ने कर्नाटक जितने के लिए अपना सब कुछ झोंक दिया है. मगर उन्हें कर्नाटक जितने के लिए वर्तमान मुख्यमंत्री सिद्दारमैया को हराना पड़ेगा जो इतना आसान नहीं होगा. सिद्धारमैया के रूप में कांग्रेस के पास एक ऐसा नेता है जिसने राजनीति का लंबा सफर तय किया है. जनता के बीच जनता के नेता के रूप में अपनी अलग पहचान बनाने वाले सिद्धारमैया के कारण ही बीजेपी को यहां काफी पसीना बहाना पड़ रहा है.

सिद्धारमैया मैसूर जिले के सिद्दरामनहुंडी गांव के एक किसान परिवार में 12 अगस्त 1948 को जन्मे थे. 10 साल की उम्र तक सिद्धारमैया ने कोई औपचारिक शिक्षा नहीं ली थी. मगर इसके बाद मैसूर विश्वविद्यालय से साइंस में ग्रेजुएशन किया और इसके बाद उन्होंने यहीं से वकालत की डिग्री भी ग्रहण  की.उनके परिवार की बात करे तो उनकी पत्‍नी का नाम पार्वती, और दो पुत्रों के नाम राकेश और यतीन्द्र हैं. राकेश कुछ फिल्मों में अभिनय कर चुके हैं, इसके साथ-साथ वे अपने पिता की मदद भी करते हैं. वहीं दुसरे बेटे यतीन्द्र डॉक्टर हैं. सिद्धारमैया ईश्वर को नहीं मानते हैं. मुख्यमंत्री बनने पर जब शपथ लेने का मौका आया तो उन्होंने ‘ईश्वर’ की जगह ‘सच्चाई’ के नाम पर शपथ ग्रहण की थी.

सिद्धारमैया ने वकालत करने के साथ-साथ विद्यार्थियों को कानून की शिक्षा भी दी है. इसके अलावा साल 1980 से 2005 तक करीब ढाई दशक तक जनता दल के सदस्य रहे सिद्दारमैया की छवि अपनी शुरूआती दौर में कांग्रेस के घोर विरोधी के रूप में थी.

मुख्यमंत्री के रूप में एचडी देवगौड़ा और जेएच पटेल के कार्यकाल के दौरान सिद्दारमैया ने वित्तमंत्रालय का कार्यभार संभाला. इस दौरान उन्होंने सात बार राज्य का बजट पेश किया. वे जद (एस) की राज्य इकाई के अध्यक्ष भी रहे हैं इसके अलावा दो बार उन्होंने कर्नाटक के उप मुख्यमंत्री का पद भी संभाला. लेकिन कहते हैं कि रास्ता कोई सा भी चुन लो मगर पहुँचते वहां हो जहाँ किस्मत में लिखा है.

कर्नाटक के तीसरे सबसे बड़े जातीय समुदाय कुरूबा से आने वाले सिद्धारमैया पिछड़े वर्ग के नेता के रूप में एक बड़े नेता के तौर पर देखे जाने लगे थे. मगर एचडी देवगौड़ा अपने पुत्र एचडी कुमारस्वामी में पार्टी नेतृत्व का भविष्य देख रहे थे. वर्ष 2004 में बनी कांग्रेस और जनता दल (एस) की गठबंधन सरकार में सिद्धारमैया को डिप्टी सीएम बनाया गया. इसके अगले ही साल 2005 में पूर्व पीएम एचडी देवेगौड़ा के जनता दल (एस) से उनको निष्कासित कर दिया गया. इन हालात में उन्होंने उसी पार्टी का दामन थामा जिससे वे लंबे अरसे से दो-दो हाथ करते रहे थे. वर्ष 2006 में वे अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस में शामिल हो गए.

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