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सिंहस्थ में हरिजनों के साथ स्नान और भोजन कर चौका दिया था स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि महाराज ने

Posted on: 25 Jun 2019 11:14 by Surbhi Bhawsar
सिंहस्थ में हरिजनों के साथ स्नान और भोजन कर चौका दिया था स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि महाराज ने

नई दिल्ली: जगद्गुरु शंकराचार्य और पद्मभूषण पूज्य गुरुदेव स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि महाराज मनाग्ल्वार को ब्रह्मलीन हो गए। बुधवार को शाम 4 बजे भारत माता जनहित ट्रस्ट के राघव कुटीर के आंगन में समाधि दी जाएगी। लंबे समय से चल रही बिमारी के चलते देहरादून के एक अस्‍पताल में उनका उपचार चल रहा था।

आगरा में हुआ जन्म

भारत माता मंदिर के संस्थापक निवृत्त शंकराचार्य पद्मभूषण महामंडलेश्वर स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि का जन्म 19 सितंबर, 1932 को आगरा में हुआ था। उनका परिवार उत्तर प्रदेश के सीतापुर का रहने वाला है। संन्यास लेने से पहले वह अंबिका प्रसाद पांडेय के नाम से जाने जाते थे। सेवाभाव की अधिकता के कारण उनका मन मानव और धर्मसेवा में अधिक लगता था और सांसारिक जीवन से उनका कोई प्रेमभाव कभी नहीं रहा।

सिंहस्थ में सबको चौका दिया था

जूना अखाड़ा पीठाधीश्वर आचार्य अवधेशानंद के गुरुस्वामी सत्यमित्रानंद ने 2004 के सिंहस्थ में सबको चौंका दिया था। इस दौरान उन्होंने हरिजनों के साथ स्नान और भोजन किया था। इअसी क्रातिकारी क्रांतिकारी पहल करने वाले पहले संत थे। 2016 में यही काम भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने किया लेकिन राजनीति स्वार्थ के चलते संत समाज ही विरोध में खड़ा हो गया था।

विदेशों में भी थी ख्याति

स्वामी सत्यमित्रानंद के पिता शिवशंकर पांडेय ने उन्हें बचपन से ही अध्ययनशीलता, चिंतन और सेवा का का पाठ पढ़ाया था। यही वजह थी कि वह अपने बाल्यावस्था से ही अध्ययनशील, चिंतक और निस्पृही व्यक्तित्व के धनी हो गए थे। सेवाभाव की अधिकता के कारण उनका मन मानव और धर्मसेवा में अधिक लगता था और सांसारिक जीवन से उनका कोई प्रेमभाव कभी नहीं रहा।

उनकी इसी खूबी के कारण विदेशों में भी उनकी ख्याति थी। उन्होंने सद्भाव, सांप्रदायिक सौहार्द और समन्वय भाव के प्रसार के लिए विश्व के 65 से अधिक देशों की यात्रा की थी। उनकी इन्ही सेवाओं को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें सर्वोच्च सम्मान पद्मभूषण से सम्मानित किया था।

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